वास्तविक अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएं: मनमोहन (लीड-1)
पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि एशियाई देशों की अर्थव्यवस्थाओं के एकीकरण के विचार पर अमल करके एक व्यापक एशियाई अर्थव्यवस्था समुदाय का गठन किया जा सकता है।
मनमोहन सिंह ने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के सदस्य देशों के साथ-साथ चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया के नेताओ से कहा, "हमें वैश्विक अर्थिक मंदी से सबक सीखना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "वैश्विक आर्थिक मंदी का एक सबक यह है कि हमें विकास की नीतियों में समन्वय सुनिश्चित करना चाहिए। दूसरा सबक है कि हमें वास्तविक अर्थव्यवस्था को मजबूत रखना चाहिए।"
मनमोहन सिंह ने कहा, "हम इस बात पर जापान से सहमत हैं कि घरेलू मांग में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। तीसरा सबक है कि व्यापार, प्रौद्योगिकी और निवेश के प्रवाह को खुला रखें।"
भारत में 1991 में उदारीकरण और मुक्त बाजार व्यवस्था के जनक अर्थशास्त्री से राजनेता बने मनमोहन सिंह ने कहा कि पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन की प्रक्रिया एक खुले, समावेशी, पारदर्शी और बाहर की ओर देखेने वाले मंच की परिकल्पना को साकार करती है।
मनमोहन सिंह ने क्षेत्र के नेताओं को याद दिलाया कि दुनिया की निगाहें एशिया पर लगी हुई हैं।
उन्होंने कहा, "एशिया वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।"
भारत द्वारा सिंगापुर और दक्षिण कोरिया के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते और आसियान के साथ वस्तुओं के व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर का उल्लेख करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, "हम जापान, चीन, थाइलैंड और मलेशिया और अन्य देशों के साथ इसी तरह के समझौते के लिए विचार विमर्श कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत आसियान और पूर्व एशिया के आर्थिक शोध संस्थानों की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अगले 10 सालों में 10 लाख डॉलर का योगदान देगा।
मनमोहन सिंह ने शिखर सम्मेलन में आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अब खतरे गैर-पारंपरिक स्रोतों से आ रहे हैं।
उन्होंने कहा, "आने वाले दिनों में इन खतरों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत होगी। इसके अलावा हमें सामाजिक समावेश और विकास में क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए अधिक प्रयास करने होंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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