बुद्धदेब ने पुलिसकर्मियों की मौत संबंधी टिप्पणी पर दी सफाई (लीड-2)

कोलकाता/नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने शनिवार को साफ किया कि उनकी सरकार को पुलिस के दो सिपाहियों, साबिर अली मुल्लाह और कांचन गाराई की मौत के बारे में कोई सूचना नहीं है। माना जाता है कि नक्सलियों ने दोनों पुलिस कर्मियों का अपहरण कर लिया है।

भट्टाचार्य ने नई दिल्ली से बांग्ला टेलीविजन चैनल चोबीस घंटा को बताया, "इस मामले में कोई गलतफमी नहीं होनी चाहिए। यदि मुझसे कोई चूक हुई है तो मुझे खुद से उसे दुरुस्त करना चाहिए। ये दोनों पुलिसकर्मी अभी भी लापता हैं। हम उनका पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है कि उनकी मौत हो गई है।"

इस सफाई के तत्काल पहले एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे पर बुद्धदेब की टिप्पणी से गलतफहमी पैदा हो गई थी।

संवाददाता सम्मेलन के दौरान राज्य में पुलिस कर्मियों पर हाल के हमलों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में भट्टाचार्य ने कहा था, "इसके पहले नक्सलियों ने पुलिस के दो सिपाहियों का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी थी। और अब उन्होंने पुलिस थाने पर हमला किया है।"

मुख्यमंत्री के इस बयान से इस मुद्दे पर गलतफहमी पैदा हो गई, क्योंकि मीडिया के एक वर्ग ने इसे इस बात के स्पष्टीकरण के रूप में ले लिया कि गाराई और साबिर मर चुके हैं।

लालगढ़ इलाके में नक्सल विरोधी अभियान के लिए तैनात राज्य सशस्त्र पुलिस के ये दोनों सिपाही 30 जुलाई से ही लापता हैं। डर इस बात का है कि शायद नक्सलियों ने उनका अपहरण कर लिया है।

मुख्यमंत्री के संवाददाता सम्मेलन के बाद राज्य के गृह सचिव अर्धेदु सेन ने कहा कि सरकार के पास ऐसी कोई सूचना नहीं है कि दोनों पुलिस कर्मी मर चुके हैं।

सेन ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपनी टिप्पणी में दोनों पुलिस कर्मियों का नाम नहीं लिया है। सेन ने कहा, "इसके पहले भी नक्सली हमलों में पुलिस के सिपाही मारे गए हैं। हो सकता है मुख्यमंत्री ने पूर्व के किसी मामले के बारे में बोला हो।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस दोनों लापता पुलिस कर्मियों की तलाश जारी रखेगी। "मैंने एक सिपाही की मां से मुलाकात की है। मैंने कहा कि हम आपके बेटे का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। हम उनकी तलाश जारी रखेंगे।"

इसके पहले नई दिल्ली में शनिवार को केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम से मुलाकात के बाद भट्टाचार्य ने नक्सलियों को छोड़े जाने के मुद्दे पर संवाददाताओं से कहा था, "यह निर्णय अपवाद था, जो मानवीय आधार पर लिया गया था।" उन्होंने कहा कि लालगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

उल्लेखनीय है कि गुरुवार दोपहर पश्चिम बंगाल की एक अदालत ने नक्सली गतिविधियों में कथित रूप से शामिल 14 जनजातीय महिलाओं को जमानत दी थी, जिसके बाद नक्सलियों ने बंधक बनाए गए पुलिस अधिकारी अतींद्र नाथ दत्ता को मुक्त किया था। नक्सलियों ने दत्ता की रिहाई के बदले यह भी एक शर्त रखी थी। पुलिस ने इन 14 महिलाओं को लालगढ़ क्षेत्र से गिरफ्तार किया था।

नक्सलियों ने दत्ता को मीडिया के समक्ष मुक्त किया था। नक्सलियों ने पश्चिमी मिदनापुर के संकरैल थाने पर हमला कर दत्ता को अगवा किया था।

भट्टाचार्य ने कहा, "हमने नक्सलियों के समक्ष समर्पण नहीं किया है। हम उनके खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।" उन्होंने कहा कि चिदंबरम ने उन्हें नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में सभी प्रकार की सहायता देने का वादा किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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