महाराष्ट्र मुख्यमंत्री चयन का अंतिम निर्णय सोनिया गांधी पर (राउंडअप)

हरियाणा में फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। यहां त्रिशंकु विधानसभा होने की वजह से राजनीतिक दल बहुमत हासिल करने के लिए निर्दलीयों के साथ ही अन्य दलों के साथ बातचीत में मशगूल हैं और जोड़-तोड़ में जुटे हैं।

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद के लिए चल रही जोड़-तोड़ के बीच विधायक दल के नेता के चयन के लिए कांग्रेस पार्टी के नवनिर्वाचित 81 विधायकों की बैठक यहां शनिवार को आयोजित की गई। बैठक के दौरान केंद्रीय पर्यवेक्षक उपस्थित रहे। लेकिन अंतिम निर्णय पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के ऊपर छोड़ दिया गया।

कांग्रेस की परंपरा का पालन करते हुए कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में एक पंक्ति का प्रस्ताव पारित किया गया कि मुख्यमंत्री का चयन सोनिया गांधी करेंगी। यह बैठक विधान भवन में आयोजित की गई।

पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पद के लिए नवनिर्वाचित विधायकों के विचारों को जानने के लिए एक केंद्रीय दल बैठक के दौरान मौजूद था। इस दल में पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह, रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी और राज्यसभा के उपसभापति के.रहमान खान शामिल थे।

वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण को हालांकि इस पद के लिए मजबूत दावेदार माना जा रहा है और सोनिया गांधी व पार्टी महासचिव राहुल गांधी का भी उन्हें मौन समर्थन है, फिर भी इस पद के दूसरे प्रबल दावेदार नारायण राणे से उन्हें कड़ा मुकाबला करना पड़ सकता है।

जहां चह्वाण को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे का समर्थन प्राप्त है, वहीं राणे को केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री विलासराव देशमुख का अप्रत्याशित समर्थन मिला हुआ है।

इसके अलावा इस पद के लिए पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष माणिक राव ठाकरे और लंबे समय से इस पद पर उम्मीद लगाए पतंगराव कदम भी दावेदार हैं।

पार्टी सूत्रों का दावा है कि नवनिर्वाचित 81 विधायकों में बहुमत नारायण राणे के पक्ष में है, जबकि दूसरी ओर यह समझा जा रहा है कि चह्वाण ने 30 निर्दलीय विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करा लिया है।

उधर अरुणाचल प्रदेश में दोरजी खांडू के लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। उन्हें शनिवार को कांग्रेस विधायक दल के नेता चुन लिया गया।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इटानगर में हुई विधायक दल की बैठक के दौरान कांग्रेस के सभी नवनिर्वाचित 42 विधायकों ने एकमत से खांडू को नेता चुना। विधायक दल की बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के पर्यवेक्षक लुईजिन्हो फलेरियो और वी. नारायणस्वामी मौजूद थे।

कांग्रेस नेता ने बताया, "विधायक दल के निर्ण्य से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अवगत कराया जाएगा। इस पर औपचारिक मुहर लगते ही खांडू मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।" गौरतलब है कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस को 60 सदस्यों वाली विधानसभा में कुल 42 सीटें मिली।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार पराजय का सामना करने के बाद शिव सेना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनिर्वाचित विधायक सोमवार को अलग-अलग बैठकें कर अपने-अपने नेता का चयन करेंगे।

शिव सेना प्रवक्ता नीलम गोरे ने आईएएनएस से कहा कि विधायकों की बैठक दोपहर में शिव सेना भवन में आयोजित की जाएगी। राज्य में पराजय के बाद अब दोनों पार्टियों के बीच नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर विवाद शुरू हो गया है। यह पद कैबिनेट मंत्री के दर्जे का होता है।

भाजपा की राज्य इकाई के महासचिव विनोद तावड़े ने शुक्रवार को कहा, "इस बार हमें ज्यादा सीटें मिली हैं, लिहाजा हम महसूस करते हैं कि नेता प्रतिपक्ष का पद भाजपा के पास आना चाहिए।"

तावड़े के सुर में सुर मिलाते हुए भाजपा प्रवक्ता माधव भंडारी ने कहा, "यदि यह मामला संख्या पर निर्भर है तो हमारे पास शिव सेना के 44 विधायकों के मुकाबले 46 विधायक हैं। जिस पार्टी के पास ज्यादा सीटें होती हैं, नियमत: नेता प्रतिपक्ष के पद पर उसका दावा बनता है।"

गोरे ने कहा है कि इस मुद्दे पर दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं के बीच चर्चा की होगी। उन्होंने कहा है कि गोपीनाथ मुंडे और नितिन गडकरी सहित अन्य भाजपा नेताओं ने चुनाव परिणाम आने के बाद सेना नेताओं से बातचीत की है।

288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में कांग्रेस को 81, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को 63, भाजपा को 46 और शिव सेना को 44 सीटें प्राप्त हुई हैं। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को 13 सीटें मिली हैं। जबकि अन्य छोटी पार्टियों और निर्दलीयों ने कुल 41 सीटों पर विजय हासिल की है।

शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार पर क्षोभ जताते हुए महाराष्ट्र के लोगों पर दगा देने का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा, " हमने कहां गलत किया? हमारे अपराध क्या थे? हमने किसका नुकसान किया था? हम इस हार से स्तब्ध हैं।?

पार्टी के मुखपत्र सामना में लगातार दूसरे दिन चुनाव में पार्टी की हार के प्रति अपने दुख का इजहार करते हुए बाल ठाकरे ने संपादकीय में लिखा है कि 44 साल तक मराठियों के हित की लड़ाई लड़ने के बावजूद मराठियों ने शिवसेना और उसकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा चुनाव में जमीन पर पटक दिया।

ठाकरे ने कहा, "मराठियों ने उनके हित के लिए किए हमारे योगदान और काम को भुला दिया। उन्होंने हमें चुनाव में जमीन पर पटक दिया।"

मराठी लोगों के स्वाभिमान, गर्व और हितों के लिए शिवसेना के लगातार संघर्ष का उल्लेख करते हुए ठाकरे ने कहा कि यह रहस्य है कि लोगों ने शिवसेना-भाजपा गठबंधन को क्यों नजरअंदाज किया।

ठाकरे ने कहा," मराठा खास कर युवाओं ने हमें धोखा दिया है और यह पीड़ादायक है।" उन्होंने इस बात का सिलसिलेवार तरीके से उल्लेख किया कि शिवसेना ने किस तरह से मराठों की सेवा की।

ठाकरे ने कहा, "जब वे नौकरी चाहते थे, दौड़ कर हमारे पास आते थे। जब वे स्कूल, कालेज में दाखिला चाहते थे, हमें याद करते थे। जब वे चिकित्या सहायता या सरकारी विभागों में सहायता चाहते थे, हमारे पास आते थे। हर समय हमने उनकी मदद की। लेकिन उसके बदले में हमें धोखा मिला।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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