राज्यसभा सदस्यता से इंकार माकपा को दिखाने के लिए नहीं : सोमनाथ

चटर्जी ने बोलपुर से आईएएनएस को फोन पर बताया, "मैंने किसी को दिखाने के लिए यह कदम नहीं उठाया है। मैं इस तरह का संदेश न तो दे सकता हूं और न देना चाहता हूं।"

चटर्जी ने कहा कि उन्होंने इस प्रस्ताव को विनम्रता के साथ ठुकरा दिया है, क्योंकि वह महसूस करते हैं कि राज्यसभा में एक नामित सदस्य के रूप में वह ज्यादा कुछ योगदान नहीं कर सकते।

चटर्जी ने कहा, "मैं एक बूढ़ा आदमी हूं। मैं नहीं समझता कि ऊपरी सदन में एक नामित सदस्य के रूप में मैं कोई उपयोगी योगदान कर सकता हूं। इसलिए मैंने कहा कि मुझे माफ कर दिया जाए।"

ज्ञात हो कि चटर्जी ने कम्युनिस्ट पार्टियों द्वारा भारत-अमेरिका परमाणु करार के मुद्दे पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) से समर्थन वापस लेने के बाद लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से इंकार कर दिया था, जबकि वह माकपा से दशकों से जुड़े हुए थे। उसके बाद पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था।

चटर्जी द्वारा प्रधानमंत्री के प्रस्ताव को ठुकराए जाने को कुछ हलकों में इस रूप में लिया जा रहा है कि उन्होंने माकपा के अपने साथियों को यह बताने के लिए ऐसा किया है कि वह पद के भूखे नहीं हैं। माकपा के नेताओं ने उन पर पार्टी के आदेश का उल्लंघन कर पद से चिपके रहने का आरोप लगाया था।

चटर्जी ने कहा, "मैंने तो सिर्फ अपने विचारों से अवगत कराया है। इसके पहले भी मुझे राज्यपाल या राजदूत बनाए जाने का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन मैंने उसे स्वीकार नहीं किया। मैंने कहा है कि मैं राजनीति से सेवानिवृत्त हो चुका हूं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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