अरूणाचल से परेहज करते हुए चीन, भारत का संबंध सुधारने का संकल्प (लीड-5)
हुआ हिन (थाईलैंड), 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने मतभेदों के कारण द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित नहीं होने देने की शनिवार को प्रतिबद्धता जाहिर की।
आसियान शिखर सम्मेलन और पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल होटल दुसित थानी में दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाएं। उनकी मुलाकात 45 मिनट तक चली। बैठक में अरूणाचल प्रदेश और तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा जैसे विवादित मुद्दों का जिक्र नहीं हुआ।
शिष्टमंडल स्तर की वार्ता से पहले सिंह ने जियाबाओ से कहा, "मैं आपसे मिलकर उत्साहित हूं।" जियाबाओ ने दोबारा प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के लिए मनमोहन सिंह को बधाई दी।
विदेश विभाग के सचिव (पूर्व) एन.रवि के अनुसार सिंह ने जियाबाओ से कहा कि राजनीतिक स्तर पर बेहतर आपसी समझ और विश्वास रहना चाहिए ताकि भारत और चीन के बीच संबंध मजबूत रहें। सिंह ने कहा कि किसी भी पक्ष को ऐसे मुद्दों की अनुमति नहीं देनी चाहिए जो हमारे संबंधों के बढ़ने में बाधा बनें।
जियाबाओ ने कहा कि भारत और चीन को सद्भावपूर्ण और मैत्रीपूर्ण ढंग से रहना चाहिए तथा समृद्धि हासिल करनी चाहिए।
जियाबाओ ने सिंह से सहमति जताते हुए कहा, "हमारे संबंध वार्ता के माध्यम से संचालित होने चाहिए और उन्हें हमारे मैत्रीपूर्ण संबंधों में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।"
वार्ता के आरंभ में जियाबाओ ने कहा, "द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए हम महत्वपूर्ण सहमति तक पहुंच चुके हैं और मेरा विश्वास है कि दोनों देश भविष्य में अच्छे संबंध कायम रखेंगे, जो दोनों देशों के हितों के अनुरूप है।"
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच "अच्छी चर्चा" और "एक फलदायक मुलाकात" हुई।
जियाबाओ ने कहा, "हम भारत के साथ स्वस्थ और स्थायी संबंध चाहते हैं। मुझे आशा है कि इस अवसर का उपयोग हम सभी संबंधित मुद्दों पर वैचारिक आदान प्रदान के लिए कर सकते हैं।"
इस बहुप्रतीक्षित मुलाकात का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर पैदा तनाव को कम करना था।
दोनों देश रणनीतिक और सहयोगात्मक साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमत हो गए।
सिंह ने चीन में कम्युनिस्ट शासन की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में कहा कि चीन के लोगों ने इस दौरान बहुत उपलब्धियां हासिल की हैं।
उन्होंने इस वर्ष जून में चीन के राष्ट्रपति हू जिन्ताओ के साथ रूस में हुई मुलाकात का भी जिक्र किया।
सिंह ने कहा कि वह भारत-चीन संबंधों में हर क्षेत्र में वृद्धि होते देखना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल अगले वर्ष होने वाली अपनी चीन यात्रा की प्रतीक्षा कर रही हैं।
इससे पहले चीन के प्रधानमंत्री ने एक पुराने मित्र की तरह सिंह का स्वागत किया और उनके साथ पहले हुई मुलाकातों का जिक्र किया।
जियाबाओ से मुलाकात के बाद मनमोहन सिंह जापान के प्रधानमंत्री युकियो हातोयामा के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इसके बाद उनका सातवें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने का कार्यक्रम है।
मनमोहन सिंह स्वदेश रवाना होने से पहले रविवार को चौथे पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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