भारत, चीन का संबंध बेहतर बनाने का संकल्प (लीड-4)
हुआ हिन (थाईलैंड), 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने शनिवार को प्रतिबद्धता जाहिर की कि वे मतभेदों के कारण द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित नहीं होने देंगे।
आसियान और पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल होटल दुसित थानी में दोनों नेताओं की करीब एक घंटे तक चली बैठक में अरूणाचल प्रदेश और तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा जैसे विवादित मुद्दों का जिक्र नहीं हुआ।
वार्ता के आरंभ में जियाबाओ ने कहा, "द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए हम महत्वपूर्ण सहमति तक पहुंच चुके हैं और मेरा विश्वास है कि दोनों देश भविष्य में अच्छे संबंध कायम रखेंगे, जो दोनों देशों के हितों के अनुरूप है।"
विदेश विभाग के सचिव (पूर्व) एन.रवि के अनुसार सिंह ने जियाबाओ से कहा कि राजनीतिक स्तर पर बेहतर आपसी समझ और विश्वास रहना चाहिए ताकि भारत और चीन के बीच संबंध मजबूत रहें। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की बातचीत गर्मजोशी वाले मैत्रीपूर्ण माहौल में सपन्न हुई।
सिंह ने कहा कि किसी भी पक्ष को ऐसे मुद्दों की अनुमति नहीं देनी चाहिए जो हमारे संबंधों के बढ़ने में बाधा बनें।
अपनी टिप्पणी में जियाबाओ ने सिंह से सहमति जताते हुए कहा, "हमारे संबंध वार्ता के माध्यम से संचालित होने चाहिए और द्विपक्षीय संबंधों में बाधा नहीं आनी चाहिए।"
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच "अच्छी चर्चा" और "एक फलदायक मुलाकात" हुई।
जियाबाओ ने कहा, "हम भारत के साथ स्वस्थ और स्थायी संबंध चाहते हैं। मुझे आशा है कि इस अवसर का उपयोग हम सभी संबंधित मुद्दों पर वैचारिक आदान प्रदान के लिए कर सकते हैं।"
इस बहुप्रतीक्षित मुलाकात का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर पैदा तनाव को कम करना था।
दोनों देश रणनीतिक और सहयोगात्मक साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमत हो गए।
सिंह ने चीन में कम्युनिस्ट शासन की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में कहा कि चीन के लोगों ने इस दौरान बहुत उपलब्धियां हासिल की हैं।
उन्होंने इस वर्ष जून में चीन के राष्ट्रपति हू जिन्ताओ के साथ रूस में हुई मुलाकात का भी जिक्र किया।
इससे पहले चीन के प्रधानमंत्री ने एक पुराने मित्र की तरह सिंह का स्वागत किया और उनके साथ पहले हुई मुलाकातों का जिक्र किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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