छत्तीसगढ़ बीटी बैंगन की वाणिज्यिक खेती के खिलाफ

रायपुर, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ सरकार ने शनिवार को कहा है कि मनुष्यों और पशुओं पर संवर्धित जीन वाले बीटी बैंगन के प्रभाव का अध्ययन किए बिना वह राज्य में इसकी वाणिज्यिक खेती की अनुमति नहीं देगी।

राज्य के कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू ने इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश को पत्र लिखा है।

साहू ने मंत्रियों को भेजे पत्र में कहा है कि मनुष्यों और पशुओं पर बीटी बैंगन के प्रभाव के व्यापक अध्ययन के बिना राज्य इसकी वाणिज्यिक खेती की अनुमति नहीं देगा।

उन्होंने आनुवांशिक रूप से परिवर्तित सब्जियों की खेती की अनुमति दिए जाने पर चिंता जताते हुए कहा कि इसका मनुष्यों और पशुओं पर गंभीर प्रभाव हो सकता है।

पत्र में साहू ने कहा कि देश की जैव-प्रौद्योगिकी नियामक संस्था 'जेनेटिक इंजीनियरिंग एप्रूवल कमेटी' (जीईएसी) में भी बीटी बैंगन की खेती की अनुमति देने को लेकर सहमति नहीं है। उन्होंने असहमति जताने वाले वैज्ञानिक पी.एम.भार्गव के नाम का भी उल्लेख किया।

उल्लेखनीय है कि जीईएसी ने बीटी बैंगन के वाणिज्यिक उत्पादन को मंजूरी दे दी है और अब उसे पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति का इंतजार है। इस संबंध में जनवरी और फरवरी में कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई होने वाली है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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