प्रधानमंत्री को स्पेक्ट्रम विवाद में घसीटे जाने से कांग्रेस नाखुश (लीड-1)
पार्टी के एक नेता ने शुक्रवार को कहा, "प्रधानमंत्री इस विवाद में कहीं भी नहीं हैं। कांग्रेस राजा की टिप्पणी से नाराज है।"
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए दूरसंचार विभाग के मुख्यालय में छापा मारा था।
बाद में राजा ने स्पेक्ट्रम आवंटन में किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा था कि उन्होंने स्पेक्ट्रम आवंटन पर पर फैसला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से विचार विमर्श करने के बाद किया था।
राजा ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा था, "मेरे इस्तीफा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। स्पेक्ट्रम के आवंटन का फैसला तय प्रक्रिया के अनुसार और प्रधानमंत्री से विचार विमर्श के बाद लिया गया था।"
इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (माकपा) ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई द्वारा केंद्रीय संचार मंत्री ए.राजा के कार्यालय की तलाशी लेने के बाद संचार मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
माकपा की केंद्रीय समिति ने एक बयान में कहा," यह स्तब्ध करने वाली बात है कि राजा ने दोहराया है कि वे जांच जारी रहने के बावजूद अपने पद पर बने रहेंगे।"
बयान में कहा गया है,"मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जरूरी है कि संचार मंत्री इस्तीफा दें।"
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने हालांकि राजा के इस्तीफे के मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि मामले की जांच की जा रही है।
सीबीआई के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा था, "निजी कंपनियों को रेडियो फ्रीक्वेंसी का आवंटन करने में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं हैं।"
प्रवक्ता ने कहा, "प्राप्त की गई सूचनाओं के मुताबिक कंपनियों को लाइसेंस आवंटित करने में दूसरंचार विभाग के अधिकारियों और निजी कंपनियों ने आपराधिक साजिश रची थी।"
सीबीआई ने इस संबंध में बुधवार को कुछ अज्ञात दूरसंचार अधिकारियों और निजी कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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