पूर्वोत्तर की महिलाओं को पुलिस के दिशा-निर्देशों पर भरोसा नहीं
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस ने पूर्वोत्तर की महिलाओं और छात्राओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं लेकिन इस समुदाय के लोगों को इस निर्देश के तहत सख्ती से कार्रवाई हो पाने पर भरोसा नहीं है।
दिल्ली पुलिस आयुक्त वाई.एस. डडवाल द्वारा अपने अधिकारियों को जारी किए नए दिशा-निर्देश में इस समुदाय के खिलाफ अपराधों को सहन न करने की बात कही गई है। लेकिन इस समुदाय के लोगों को डर है कि कहीं ये दिशा निर्देश भी केवल दस्तावेज बनकर न रह जाएं।
वाई. एस. डडवाल ने एक सर्कुलर जारी कर पुलिसकर्मियों से कहा कि जैसे ही उनके पास कोई शिकायत आए तो वह उस पर त्वरित कार्रवाई करें।
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत कहते हैं, "पिछले साल पूर्वोत्तर की महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ने के बाद एक सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही गई थी। दो सप्ताह पहले इस सर्कुलर का नवीनीकरण कर इसमें संबद्ध अधिकारियों के नए संपर्क नंबर दिए गए हैं।"
उन्होंने कहा, "हम पूर्वोत्तर के विभिन्न छात्र संगठनों के संपर्क में हैं ताकि किसी भी अपराध की सूचना तुरंत मिल सके।"
यद्यपि पूर्वोत्तर की ज्यादातर महिलाओं को इस शुरुआत के कारगर होने की अधिक उम्मीद नहीं है।
पिछले दो वर्षो से दिल्ली में काम कर रहीं असम की कस्तूरी नाथ कहती हैं, "दिल्ली पुलिस का यह अच्छा प्रयास है लेकिन मुझे इसके कारगर होने के प्रति संशय है। लगभग हर दिन ही पूर्वोत्तर की महिलाओं के खिलाफ अपराध की बात सुनने को मिलती है लेकिन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई बहुत कम होती है।"
'पूर्वोत्तर सहायता केंद्र और हेल्पलाइन' से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2006 और 2007 में पूर्वोत्तर के लड़कों और लड़कियों के प्रति अपराध के करीब 100 मामले सामने आए थे।
सहायता केंद्र के लानसिन्गलू का कहना है, "मैंने दिल्ली पुलिस के सर्कुलर के विषय में सुना है लेकिन अब तक इसे देखा नहीं है इसलिए मुझे नहीं पता कि इसमें क्या है। यदि पुलिस अपराधियों के प्रति ज्यादा सख्त होती है और पूर्वोत्तर के लोगों की मदद के लिए आगे आती है तो यह अच्छी बात है। इससे हमारा काम भी आसान होगा क्योंकि तब लोग सीधे पुलिस के पास जाएंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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