विधानसभा चुनाव : महाराष्ट्र, अरूणाचल और हरियाणा में जनता का हाथ फिर कांग्रेस के साथ (राउंडअप)

अरूणाचल प्रदेश में उसने विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ करते दो तिहाई बहुमत और महाराष्ट्र में बहुमत हासिल कर लिया है जबकि हरियाणा में वह बहुमत के आंकड़े से छह सीट दूर रह गई है।

निर्वाचन आयोग से मिले आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में कांग्रेस-राष्ट्रवादी गठबंधन (राकांपा) 146 सीटें जीत चुका है। कुल 288 सीटों वाली राज्य विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 145 है। ऐसे में महाराष्ट्र में एक बार फिर कांग्रेस-राकांपा की गठबंधन सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। अब यहां यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस फिर से अशोक चव्हाण पर भरोसा करते हुए उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाए रखती है या फिर कोई बदलाव करती है।

इस चुनाव में भाजपा-शिव सेना गठबंधन को तगड़ा झटका लगा है। वह सत्ता पाने में लगातार तीसरी बार असफल रहा है। इस गठबंधन को मात्र 90 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। इस चुनाव की एक उल्लेखनीय बात यह भी रही कि शिव सेना अब विधानसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी भी नहीं रही। उससे यह दर्जा उसी की सहयोगी भाजपा ने छीन लिया। महाराष्ट्र में भाजपा सबसे बड़े विपक्षी दल के रूप में उभरी है। उसके 46 उम्मीदवारों ने चुनाव में जीत दर्ज की है, जबकि शिवसेना को 44 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है। पिछले दो दशक में शिवसेना की यह सबसे करारी शिकस्त है।

भाजपा-शिव सेना गठबंधन को सत्ता से दूर रखने में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने भी अहम भूमिका निभाई। राज ठाकरे की यह पार्टी भी इस चुनाव में एक ताकत के रूप में उभरी हैं। मनसे ने जीती तो महज 13 सीटें हैं, लेकिन उसने इस चुनाव में भाजपा-शिव सेना गठबंधन को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है।

भाजपा और शिव सेना गठबंधन ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। दोनों दलों के नेताओं ने राज्य में गठबंधन की हार के लिए मनसे को जिम्मेदार ठहराया है।

चुनाव परिणामों को अपेक्षा के विपरीत करार देते हुए भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा, "परिणाम हमारी आशा के अनुरूप नहीं रहे। हम अपनी हार स्वीकार करते हैं।"

उन्होंने कहा, "चुनावों में हार से हमें निराशा हुई है लेकिन हम हताश नहीं हुए हैं। हमें अपनी कमजोरियों के बारे में सोचना पड़ेगा और ईमानदारी से उनका विश्लेषण करना पड़ेगा।"

प्रसाद ने जोर देकर कहा, "चुनावी नतीजों से हमें एक सीख जरूर मिली है और वह यह है कि हमें अपने कार्यकर्ताओं के समक्ष एक स्वर में बोलना होगा।"

महाराष्ट्र में हुई पराजय के लिए उन्होंने मनसे को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र में हमने कांग्रेस-राकांपा को कड़ी टक्कर दी है। मनसे फैक्टर ने हमें प्रभावित किया। मनसे जहां 12 सीटों के आसपास जीतने में सफल रही वहीं उसने 40-45 सीटों पर हमें नुकसान पहुंचाया।"

राज्य में पार्टी के चुनाव अभियान का नेतृत्व करने वाले भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने भी कहा, "मनसे के कारण मुंबई में हमारी हार हुई है।" मुंबई में विधानसभा की 36 सीटें हैं।

कांग्रेस ने महाराष्ट्र की जीत का श्रेय अपनी गरीब हितैषी नीतियों और इन नीतियों से गरीब जनता को मिले लाभ को दिया है।

चुनाव में मिली जीत से उत्साहित कांग्रेस के सभी कद्दावर नेताओं मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे, केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख और सुशील कुमार शिंदे ने एक साथ एक मंच से कांग्रेस को लगातार तीसरी बार सत्ता में लाने के लिए महाराष्ट्र की जनता को धन्यवाद दिया।

ठाकरे ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मैं सभी को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को अपना बहुमूल्य वोट दिया। जनता ने कांग्रेस-राकांपा सरकार की विकासशील नीतियों के लिए वोट दिया। हमारी सरकार गरीबों में भी सबसे गरीब तक पहुंचने में सफल रही, जो कि कांग्रेस की नीति है।"

मुख्यमंत्री चव्हाण ने कांग्रेस नेताओं और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा महासचिव राहुल गांधी को भी गरीब हितैषी नीतियों को जनता तक पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए धन्यवाद दिया।

उधर, हरियाणा में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है। कांग्रेस निश्चित तौर पर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है लेकिन बहुमत के लिए आवश्यक 46 सीटों के आंकड़े से वह छह सीट पीछे रह गई है।

निर्वाचन आयोग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को 40 सीटों पर जीत मिली है। प्रमुख विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) 31 सीटें जीतने में सफल रहा है।

हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) छह सीटें और भाजपा चार सीटें जीतने में सफल रही है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने एक-एक सीट पर कब्जा जमाया है। अन्य सात सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।

यदि कांग्रेस यहां सरकार बनाने में सफल रहती है तो यह राज्य के इतिहास में पहला मौका होगा जब किसी सत्ताधारी दल की चुनाव के बाद दोबारा ताजपोशी होगी।

बहुमत प्राप्त करने में असफल रही कांग्रेस ने विश्वास जताया है कि राज्य में अगली सरकार उसी की बनेगी। मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "चुनाव परिणामों से नर्वस होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। हमें पूरा विश्वास है कि हम अगली सरकार बनाएंगे।"

हुड्डा ने कहा, "कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में यदि किसी को भी विश्वास है तो वह हमारे साथ आ सकता है।"

नतीजों से उत्साहित इनेलो अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला ने कहा है कि राज्यपाल को सरकार बनाने के लिए पहले विपक्ष को न्योता देना चाहिए।

चौटाला ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "हम राज्यपाल से अपील करते हैं कि वह विपक्षी दलों को सरकार बनाने का पहले न्योता दें, जो कि सबसे बड़े समूह के रूप में उभर कर सामने आए हैं। मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा को नैतिक आधार पर तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और कांग्रेस को सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करना चाहिए।"

सुदूर पूर्वोत्तर के राज्य अरूणाचल प्रदेश में भी कांग्रेस ने सभी विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ करते हुए 60 सदस्यीय राज्य विधानसभा में दो तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। कांग्रेस ने यहां 42 सीटों पर जीत दर्ज की है। यहां प्रमुख विपक्षी दलों में राकांपा और तृणमूल कांग्रेस ने पांच-पांच सीटें जीती है, जबकि भाजपा तीन सीटें जीतने में सफल रही है। पांच निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी यहां जीत दर्ज की है।

मुख्यमंत्री दोरजी खांडू सहित कांग्रेस के तीन उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। शेष 57 सीटों के लिए 13 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इसमें 750,000 मतदाताओं में से 72 फीसदी ने मतदान किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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