रिलायंस इंडस्ट्री को समझौते दोनों चीजें अस्वीकार्य
रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से अदालत में उपस्थित वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि सरकार की गैस कीमत की नीति केवल पांच साल के लिए है और इस कारण 17 वर्षो तक गैस आपूर्ति समझौते का पालन नहीं किया जा सकता है।
प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन, न्यायाधीश आर. वी. रवींद्रन और न्यायाधीश पी. सथशिवम की खंडपीठ के समक्ष साल्वे ने यह भी कहा कि गैस की कीमत सरकार द्वारा निर्धारित कीमत के अनुरूप होनी चाहिए जो प्रति यूनिट 4.20 डॉलर है। उन्होंने कहा ऊंची कीमत से सरकारी खजाने को ज्यादा राजस्व प्राप्त होगा।
अंबानी बंधुओं के बीच की इस कानूनी विवाद पर मंगलवार से सुनवाई चल रही है।
रिलायंस इंडस्ट्री के वकील ने यह भी कहा कि 4.20 डॉलर प्रति यूनिट की कीमत नया नहीं है बल्कि अनिल अंबानी की कंपनी ने ही आंध्र प्रदेश की ऊर्जा परियोजना के लिए इस कीमत पर गैस खरीदने के लिए तैयार हुई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के पास गैस की कीमत तय करने का अधिकार है और सरकार द्वारा गैस वितरण नीति को तैयार करने में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
आंध्र प्रदेश के कृष्णा गोदावरी बेसिन से निकलने वाली गैस को लेकर दोनों भाइयों के बीच विवाद है। वर्ष 2005 में रिलायंस समूह के बंटवारे से पूर्व इस बेसिन से गैस उत्पादन का ठेका रिलायंस इंडस्ट्रीज को दिया गया था।
पारिवारिक समझौते के मुताबिक अनिल अंबानी समूह इस बेसिन से प्रतिदिन 2.8 करोड़ यूनिट गैस की आपूति 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से 17 वर्षो तक चाहता है, लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज का कहना है कि वह केवल 4.20 डॉलर प्रति यूनिट की दर से गैस की बिक्री करेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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