विधानसभा चुनाव : तीनों राज्यों में कांग्रेस का परचम, भगवा ब्रिगेड की हवा निकली (लीड-1)

निर्वाचन आयोग से मिले ताजा आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में कांग्रेस-राष्ट्रवादी गठबंधन (राकांपा) 101 सीटों पर जीत चुका है और 42 सीटों पर उसने बढ़त बनाई हुई है जबकि भाजपा-शिव सेना गठबंधन 63 सीटें जीत चुका है और उसने 29 सीटों पर बढ़त बना रखी है।

इसके मुताबिक कांग्रेस-राकांपा गठबंधन को 143 और भाजपा-शिवसेना गठबंधन को 92 सीटें मिलने के आसार हैं। राज्य में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 145 के जादुई आंकडें़ की जरूरत है।

भाजपा और शिव सेना गठबंधन ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। भाजपा और शिव सेना नेताओं ने राज्य में गठबंधन की हार के लिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को जिम्मेदार ठहराया है।

भाजपा ने चुनाव परिणामों को अपेक्षा के विपरीत बताया है। पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा, "परिणाम हमारी आशा के अनुरूप नहीं रहे। हम अपनी हार स्वीकार करते हैं।"

उन्होंने कहा, "चुनावों में हार से हमें निराशा हुई है लेकिन हताशा नहीं। हमें अपनी कमजोरियों के बारे में सोचना पड़ेगा और ईमानदारी से उनका विश्लेषण करना पड़ेगा।"

प्रसाद ने जोर देकर कहा, "चुनावी नतीजों से हमें एक सीख जरूर मिली है और वह यह है कि हमें अपने कार्यकर्ताओं के समक्ष एक स्वर में बोलना होगा।"

महाराष्ट्र में हुई पराजय के लिए उन्होंने मनसे को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र में हमने कांग्रेस-राकांपा को कड़ी टक्कर दी है। मनसे फैक्टर ने हमें प्रभावित किया। मनसे जहां 12 सीटों के आसपास जीतने में सफल रही वहीं उसने 40-45 सीटों पर हमें नुकसान पहुंचाया।"

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि राज्य में फिर से कांग्रेस-राकांपा गठबंधन की सरकार बनेगी और इस बार कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी।

राज्य में पार्टी के चुनाव अभियान का नेतृत्व करने वाले भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने भी कहा, "मनसे के कारण मुंबई में हमारी हार हुई है।" मुंबई में विधानसभा की 36 सीटें हैं।

उधर, हरियाणा में कांग्रेस बहुमत के जादुई आंकड़े से पांच सीट पीछे रह गई है। यदि कांग्रेस यहां सरकार बनाने में सफल रहती है तो यह राज्य के इतिहास में पहला मौका होगा जब किसी सत्ताधारी दल की चुनावों के बाद दोबारा ताजपोशी होगी।

निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस ने 39 सीटें जीत ली है और एक सीट पर वह बढ़त बनाए हुए है जबकि प्रमुख विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने 30 सीटों पर चुनाव जीता है और एक पर बढ़त बना रखी है। वर्ष 2005 में इनेलो ने केवल नौ सीटों पर जीत दर्ज की थी।

हरियाणा जनहित कांग्रेस छह सीटें, भाजपा चार सीटें जीतने में सफल रही है। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने एक-एक सीट पर कब्जा जमाया है। अन्य सात सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।

राज्य के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा है कि कांग्रेस को जैसे प्रदर्शन की उम्मीद थी वह इस चुनाव में वैसा प्रदर्शन नहीं कर सकी।

उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "परिणाम हमारी अपेक्षा के अनुरूप नहीं हैं लेकिन फिर भी कांग्रेस राज्य में इतिहास बनाने जा रही है। हम समीक्षा करेंगे कि हमें उम्मीद के मुताबिक सीटें क्यों नहीं मिली।"

अरूणाचल प्रदेश में कांग्रेस ने सभी विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ कर दिया है। अब तक आए नतीजों के मुताबिक वह 33 सीटें जीत चुकी है जबकि पांच पर उसने बढ़त बना रखी है। यहां के प्रमुख विपक्षी दलों में राकांपा और तृणमूल कांग्रेस ने पांच-पांच सीटें जीती है जबकि दोनों दल एक-एक सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं।

मुख्यमंत्री दोरजी खांडू सहित कांग्रेस के तीन उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। शेष 57 सीटों के लिए 13 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इसमें 750,000 मतदाताओं में से 72 फीसदी ने मतदान किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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