आर्थिक विकास दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान (लीड-1)
परिषद ने बुधवार को यद्यपि यह कहा कि औद्योगिक उत्पादन में 8.2 फीसदी की वृद्धि होगी, जबकि पिछले वित्त वर्ष में वृद्धि की दर 3.9 फीसदी थी। सेवा क्षेत्र में विकास दर पिछले वित्त वर्ष के 9.7 फीसदी से कम 8.2 फीसदी रहने का अनुमान है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को रिपोर्ट सौंपने के बाद परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा, "ऐसा नहीं लगता कि विकास दर 6.25 फीसदी से कम होगी लेकिन यह 6.75 फीसदी तक पहुंच सकती है।"
पिछले वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर 6.7 फीसदी थी।
उन्होंने कहा, "हाल के वर्षो में भारतीय अर्थव्यवस्था ने बेहतर प्रदर्शन किया है।" उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था आर्थिक संकट को झेल चुकी है और वह आज भी दुनिया की दूसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु :
-भारतीय अर्थव्यस्था वित्तीय संकट को बेहतर तरीके से झेल चुकी है।
-वित्तीय और मौद्रिक नीति के बीच समायोजन बेहतर रहा।
-मंदी और धनी देशों में मांग में आई कमी के कारण निर्यात प्रभावित हुआ।
-वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की भविष्य की नकारात्मक चीजें भारत की विकास दर को प्रभावित कर सकता है।
- वर्ष 2009-10 में निवेश की दर 36.5 फीसदी रहने का अनुमान।
-वर्ष 2009-10 के दौरान बचत दर 34.5 फीसदी रहने का अनुमान।
- रबी फसलों की पैदावार बेहतर रहने का अनुमान।
-वर्ष 2009-10 में अनाज का उत्पादन 22.3 करोड़ टन रहने का अनुमान।
-चालू खाता घाटा जीडीपी का दो फीसदी रहने का अनुमान।
- वर्ष 2009-10 के दौरान 188.9 अरब डॉलर का अनुमानित निर्यात।
-वर्ष 2009-10 के दौरान 306 अरब डॉलर का अनुमानित आयात।
- विदेश व्यापार घाटा 117 अरब डॉलर रहने का अनुमान।
- 57.3 अरब डॉलर की पूंजी आने का अनुमान।
- खाद्य पदार्थो की महंगाई बढ़ने और थोक मूल्य सूचकांक में 13 फीसदी की वार्षिक वृद्धि का अनुमान।
- प्राथमिक खाद्य सूचकांक में 33 फीसदी की भारी वृद्धि का अनुमान।
- वैश्विक बाजार में तेल और कमोडिटी की ऊंची कीमतें बने रहने का अनुमान।
-मार्च 2010 में मुद्रास्फीदी छह फीसदी रहने का अनुमान।
- सितंबर 2009 तक बैंक ऋण में सुस्ती रही।
- कारपोरेट जगत ने घरेलू बाजार से भारी धन इकट्ठा किया।
- वर्ष 2009-10 के दौरान अनुमानित बजट घाटा 10.09 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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