अभियांत्रिकी प्रवेश परीक्षा सुधार के मुद्दे पर समिति गठित
समिति प्रवेश परीक्षा के प्रारुप पर भी विचार करेगी और यह भी तय करेगी कि बारहवीं की परीक्षा के परिणाम को भी महत्व दिया जाए या नहीं, क्योंकि कई एनआईटी के निदेशकों का मानना है कि कुकुरमुत्तों की तरह उग रहे कोचिग इंस्टीट्यूट एनआईटी में प्रवेशार्थियों का पैटर्न बिगाड़ रहे हैं।
इलाहाबाद, कालीकट और अगरतला के एनआईटी के निदेशकों की यह समिति अपनी रिपोर्ट जनवरी तक सौंप देगी। समिति इस समस्या पर भी गौर करेगी कि कई दौर के काउंसलिग के बाद भी कई एनआईटी में सीटें क्यों खाली रह जाती हैं। क्या इसकी वजह कुछ पाठ्यक्रमों का बाजारोन्मुखी नहीं होना है, यदि ऐसा है तो समिति उसका विकल्प सुझाएगी। ये सभी फैसले केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की अध्यक्षता में एनआईटी निदेशकों की आज हुई पहली बैठक में किए गए।
इस बैठक के दौरान पाठ्यक्रम प्रारुप यानी देश, उद्योग जगत और बाजार की मौजूदा तथा प्रभावी जरूरतों को देखते हुए पाठ्यक्रम में संशोधन पर विचार विमर्श के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया गया। समिति में त्रिची, सुरथकाल और वारंगल के एनआईटी के निदेशक शामिल होंगे और वे उद्योग जगत से भी विचार विमर्श करेंगे। मंत्री ने सभी एनआईटी से ²ष्टिकोण प्रपत्र तैयार करने को कहा ताकि उस पर परिषद की अगली बैठक में विचार हो सके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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