मारन यूरोप यात्रा पर जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे
कपड़ा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के महत्व को पहचानते हुए कपड़ा मंत्रालय ने उन देशों का सर्वेक्षण करवाया था, जिनके पास इस क्षेत्र में भारत में निवेश की प्रचुर क्षमता थी। अध्ययन के दौरान जर्मनी और स्विट्जरलैंड की कम्पनियों को कपड़ा मशीनरी एवं अत्यधिक रेशे वाले कपड़े के क्षेत्र में निवेश के लिए महारत प्राप्त एवं समर्थ पाया गया तथा तुर्की, इटली एवं फ्रांस की कम्पनियों को वस्त्र निर्माण एवं कपड़े में निवेश के लिए क्षमतावान पाया गया।
कपड़ा क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के ये प्रयास मारन के द़ष्टिकोण के परिचायक हैं। भारत में सशक्त घरेलू बाजार है जिसने इस वैश्विक मंदी से उबरने में मदद की। मारन ने 'भारत आओ, भारत में निर्माण करो, भारत में बेचो और भारत में धन कमाओ' का नारा दिया है। मारन ने दूरसंचार क्षेत्र में भी इस नीति पर काम किया था और उसके बड़े अच्छे परिणाम आए थे। यह पहली बार हो रहा है कि सरकार और उद्योग जगत कपड़ा क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए एक साथ प्रयास कर रहे हैं।
रोड शो के पहले चरण के दौरान स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल कपड़ा मशीनरी विनिर्माताओं के साथ संवाद करेगा। दूसरे चरण में प्रतिनिधिमंडल कपड़ा प्रौद्योगिकी में निवेश के लक्ष्य से 23-26 नवम्बर के दौरान जर्मनी के फ्रेंकफर्ट और फ्रांस के पेरिस की यात्रा करेंगे।
भारतीय कपड़ा उद्योग को आठ प्रतिशत वृद्घि दर कायम रखने के लिए 2015 तक 24 अरब अमेरिकी डालर के अतिरिक्त निवेश की जरूरत है। इसमें 18 अरब अमरीकी डॉलर घरेलू निवेश तथा 6 अबर डॉलर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हो सकते हैं। भारतीय कपड़ा क्षेत्र वर्ष 2008 में 200 करोड़ डालर (33 अरब डालर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का मात्र 6 प्रतिशत) आकर्षित कर पाया जबकि चीन का कपड़ा क्षेत्र 10 अरब डालर विदेशी निवेश आकर्षित करने में सफल रहा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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