जलवायु परिवर्तन से मिलकर लड़ेंगे भारत-चीन (लीड-1)
भारत की ओर से केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश तथा चीन की ओर से वहां के राष्ट्रीय विकास एवं सुधार आयोग के उपाध्यक्ष मंत्री जी़ जेन्हुआ ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समझौते पर हस्ताक्षर से पहले जयराम रमेश ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जलवायु संधियों पर बातचीत के स्तर में भारत और चीन के बीच कोई खास अंतर नहीं है।
कोपनहेगन में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के मद्देनजर यह समझौता बहुत महत्व रखता है।
रमेश ने कहा कि वह चीनी पर्यावरण मंत्री जी़ झेन्हुआ से आगे भी बातचीत जारी रखेंगे ताकि दोनों देश कोपनहेगन सम्मेलन की सफलता सुनिश्चित कर सकें और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर विकासशील देशों के हितों की रक्षा कर सकें।
इस समझौते से ऊर्जा संरक्षण कुशलता, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ कोयला, मीथेन प्राप्ति एवं उपयोग, पौधारोपण, वनों एवं पारिस्थितिकी तंत्र के संपोषकीय प्रबंधन, परिवहन एवं स्वच्छ पर्यावरण को बढ़ावा तथा ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी के लिए कार्याक्रमों, परियोजनाओं, प्रौद्योगिकी विकास तथा प्रदर्शनियों के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा।
दोनों पक्ष जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर परस्पर सहयोग और द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत-चीन साझेदारी पर सहमत हुए। इसके तहत दोनों पक्ष जब भी जरूरत होगी, मंत्री स्तर पर वार्ता करेंगे।
दोनों पक्षों के बीच भारत चीन कार्यदल के गठन पर भी सहमति बनी। कार्यबल जलवायु परिवर्तन पर अंतर्राष्ट्रीय वार्ता, अपनी-अपनी घरेलू नीतियों तथा संबंधित परस्पर सहयोग वाली परियोजनाओं के क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक बार चीन और एक बार भारत में वार्षिक बैठक करेंगे।
दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत थे कि वे इस समझौते की व्याख्या तथा क्रियान्वयन के दौरान उत्पन्न होने वाले किसी भी विवाद का समाधान परस्पर बातचीत के जरिए करेंगे। यह समझौता हस्ताक्षर के दिन ही लागू होगा तथा यह पांच वर्षो तक प्रभावी रहेगा। यदि कोई पक्ष इस समझौते को निरस्त करना चाहेगा तो उसे छह महीने पहले नोटिस देना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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