आर्थिक वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहेगी (राउंडअप)

परिषद के मुताबिक पिछले वर्ष के दौरान कृषि उत्पादन में आई दो फीसदी की गिरावट के कारण विकास दर कम रहने की संभावना है।

प्रधानमंत्री को बुधवार को सौंपी रिपोर्ट में परिषद ने कहा कि वर्ष 2009-10 के दौरान औद्योगिक उत्पादन में 8.2 फीसदी की वृद्धि होगी, जबकि पिछले वित्त वर्ष में वृद्धि की दर 3.9 फीसदी थी। सेवा क्षेत्र में विकास दर पिछले वित्त वर्ष के 9.7 फीसदी से कम 8.2 फीसदी रहने का अनुमान है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को रिपोर्ट सौंपने के बाद परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा, "ऐसा नहीं लगता कि विकास दर 6.25 फीसदी से कम होगी लेकिन यह 6.75 फीसदी तक पहुंच सकती है।"

पिछले वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर 6.7 फीसदी थी।

उन्होंने कहा, "हाल के वर्षो में भारतीय अर्थव्यवस्था ने बेहतर प्रदर्शन किया है।" उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था आर्थिक संकट को झेल चुकी है और वह आज भी दुनिया की दूसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है।

परिषद ने यह भी कहा कि महंगाई में बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए कड़ी मौद्रिक नीति को आगे भी जारी रखने की जरूरत है।

रंगराजन ने पत्रकारों से कहा, "मौद्रिक नीति के रुख को बहुत उदार सोच की स्थिति से बदलना होगा, लेकिन इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा। यह अर्थव्यवस्था में विकास की संभावना और महंगाई के दबाव पर निर्भर करेगा।"

इस महीने की 27 तारीख को मुंबई में भारतीय रिजर्व बैंक की बैठक में मौद्रिक नीति की होने वाली तिमाही समीक्षा में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा जा सकता है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2010 के शुरू से ब्याज दरों को कठोर किया जा सकता है।

रंगराजन ने कहा कि कारपोरेट जगत की कीमत पर सरकार को ज्यादा उधार लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं नहीं सोचता कि और उधार की जरूरत है। सार्वजनिक उपक्रम में विनिवेश से भी कोष प्राप्त होंगे।"

परिषद के अध्यक्ष ने यह भी अनुमान लगाया कि चालू वित्त वर्ष में बजट घाटा 10.09 फीसदी तक पहुंच जाएगा जो पिछले वर्ष 8.6 फीसदी था।

कृषि और ऊर्जा क्षेत्र पर विशेष ध्यान की जरूरत :

आर्थिक सलाहकार परिषद ने अगले कुछ वर्षो तक कृषि और ऊर्जा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिए जाने का सुझाव दिया है।

परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा, "मध्यावधि तक हमें मोटे तौर पर दो क्षेत्रों कृषि और ऊर्जा पर ध्यान देने की जरूरत है।"

'आर्थिक अनुमान 2009-10' जारी करने के बाद रंगराजन ने पत्रकारों से कहा, "ऊर्जा क्षेत्र में हमें यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि हमने जो लक्ष्य तय किया है वह हासिल किया जाए। हम लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं। हमें 11वीं पंचवर्षीय योजना के बाकी दो वर्षो में 50 हजार मेगावाट बिजली पैदा करनी होगी।"

ईंधन की कीमत बढ़ाने की जरूरत नहीं :

आर्थिक सलाहकार परिषद ने कहा है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल (159 लीटर) के बीच बनी रहती है तो घरेलू बाजार में पेट्रोलियम पदार्थो की कीमत बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है।

'आर्थिक आकलन 2009-10' को जारी करने के मौके पर परिषद के सदस्य गोविंद राव ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत यदि 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो हमें कीमतें बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी।"

राव ने कहा, "हम वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने की आशा करते हैं। यदि कीमत इससे ज्यादा होती है तो परिवर्तन करना पड़ सकता है।"

वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 79 डॉलर प्रति बैरल है जो एक साल का उच्चतम स्तर है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु :

-भारतीय अर्थव्यस्था वित्तीय संकट को बेहतर तरीके से झेल चुकी है।

-वित्तीय और मौद्रिक नीति के बीच समायोजन बेहतर रहा।

-मंदी और धनी देशों में मांग में आई कमी के कारण निर्यात प्रभावित हुआ।

-वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की भविष्य की नकारात्मक चीजें भारत की विकास दर को प्रभावित कर सकता है।

- वर्ष 2009-10 में निवेश की दर 36.5 फीसदी रहने का अनुमान।

-वर्ष 2009-10 के दौरान बचत दर 34.5 फीसदी रहने का अनुमान।

- रबी फसलों की पैदावार बेहतर रहने का अनुमान।

-वर्ष 2009-10 में अनाज का उत्पादन 22.3 करोड़ टन रहने का अनुमान।

-चालू खाता घाटा जीडीपी का दो फीसदी रहने का अनुमान।

- वर्ष 2009-10 के दौरान 188.9 अरब डॉलर का अनुमानित निर्यात।

-वर्ष 2009-10 के दौरान 306 अरब डॉलर का अनुमानित आयात।

- विदेश व्यापार घाटा 117 अरब डॉलर रहने का अनुमान।

- 57.3 अरब डॉलर की पूंजी आने का अनुमान।

- खाद्य पदार्थो की महंगाई बढ़ने और थोक मूल्य सूचकांक में 13 फीसदी की वार्षिक वृद्धि का अनुमान।

- प्राथमिक खाद्य सूचकांक में 33 फीसदी की भारी वृद्धि का अनुमान।

- वैश्विक बाजार में तेल और कमोडिटी की ऊंची कीमतें बने रहने का अनुमान।

-मार्च 2010 में मुद्रास्फीदी छह फीसदी रहने का अनुमान।

- सितंबर 2009 तक बैंक ऋण में सुस्ती रही।

- कारपोरेट जगत ने घरेलू बाजार से भारी धन इकट्ठा किया।

- वर्ष 2009-10 के दौरान अनुमानित बजट घाटा 10.09 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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