उल्फा व लिट्टे के बीच संबंध उजागर हुए
गुवाहाटी, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश के शीर्ष उग्रवादी संगठन युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के एक विद्रोही नेता ने बुधवार को पहली बार इस बात की पुष्टि की है कि उल्फा और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के बीच संबंध रहे हैं। इससे दो दिनों पहले ही सेना ने कुछ ऐसे कागजात बरामद किए थे, जिसमें तमिल लड़ाकों से हथियार खरीदे जाने के बदले भुगतान करने के सबूत दर्ज हैं।
अतीत में खुफिया रिपोर्टों के हवाले से अक्सर खबरें आती रही हैं कि प्रतिबंधित उल्फा के लिट्टे के साथ सीधे संबंध हैं।
19 कुमाऊ रेजीमेंट के सैनिकों ने सोमवार को एक गड्ढे में छुपाए गए हथियारों और विस्फोटकों के भारी जखीरे को बरामद किया था। यहां से उल्फा के वित्तीय लेन-देन से संबंधित कागजात भी बरामद किए गए थे।
सेना के एक कमांडर ने कहा है, "एक अकाउंट स्टेटमेंट में यह दर्ज था कि उल्फा ने हथियारों की खरीद के लिए लिट्टे को 23 लाख रुपये का भुगतान किया।"
अब पहली बार किसी उल्फा नेता ने लिट्टे के साथ संबंधों की बात स्वीकार की है।
उल्फा के बातचीत समर्थक धड़े के वरिष्ठ नेता प्रबल नियोग ने आईएएनएस को बताया, "यह 90' के दशक के शुरुआत की घटना है। उस समय मैं पूर्वी असम के तिनसुकिया जिले में स्थित लाखीपाथर शिविर में एक सामान्य सदस्य था। उस समय मैंने अपने मुख्य कमांडर परेश बरुआ के साथ तीन श्रीलंकाई तमिलों को देखा था। उसके बाद हमें बताया गया था कि वे लिट्टे से हैं।"
ज्ञात हो कि उल्फा की अति आक्रामक 28वीं बटालियन की अल्फा और चार्ली कंपनियों ने पिछले वर्ष जून महीने में एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कर दी थी।
नियोग ने कहा, "उल्फा और लिट्टे के बीच संबंधों के बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं जानता, लेकिन उस समय हमने अपने वरिष्ठों से सुना था कि दोनों के बीच कुछ बातें चल रही हैं। जिस समय इस तरह के संबंध विकसित हुए थे, उस समय हम उम्र में बहुत कच्चे थे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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