जलवायु परिवर्तन पर वार्ता में व्यापारिक अवरोध न खड़ा किया जाए : सरन
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री के विशेष दूत श्याम सरन ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के मामले में उद्योग जगत और सरकार की असली चिंता यह है कि बातचीत के बीच में मुक्त व्यापार और निवेश संबंधी अवरोध नहीं खड़े किए जाने चाहिए।
श्याम सरन ने आईएएनएस के साथ एक विशेष बातचीत में कहा है, "हमने यह कहते हुए अपने दृष्टिकोण को पहले ही साफ कर दिया है कि इस तरह का कोई भी कदम जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र प्रारूप समझौते (यूएनएफसीसीसी) के विपरीत होगा और डब्ल्यूटीओ के भी अनुरूप नहीं होगा।"
श्याम सरन ने कहा है, "हम इस खतरे के प्रति बहुत सजग हैं और अन्य विकासशील देशों के साथ हम बातचीत के दौरान इस तरह की प्रवृत्तियों से लड़ रहे हैं, लेकिन फिर भी खतरा मौजूद है।"
भारत की ओर से कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन की असाधारण वैश्विक चुनौती के खिलाफ सामूहिक प्रतिक्रिया के लिए व्यापारिक मुद्दे विषय से संबद्ध नहीं हैं।
सरन ने यह भी कहा है कि भारत ने हाल में हुई वार्ताओं में इस बात की इच्छा जाहिर की थी कि विकसित देशों को एक ऐसी वैश्विक कार्यप्रणाली विकसित करनी चाहिए जिसके तहत चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकने वाली वर्तमान प्रौद्योगिकियों को तेजी के साथ व्यापक पैमाने पर फैलाया जा सके।
सरन ने कहा है, "हमने यह बात पहले ही कह दी है कि यदि जलवायु परिवर्तन वैश्विक चुनौती है और मानवता के लिए खतरा है और यदि यहां ऐसी वर्तमान प्रौद्योगिकियां हैं, जो चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं तो क्या कोई वैश्विक कार्यप्रणाली विकसित करना अर्थवान नहीं होगा, जिसके जरिए इन प्रौद्योगिकियों को तेजी के साथ फैलाया जा सके?"
सरन ने आगे कहा, "विकासशील देशों में क्षमताओं के विकास के लिए भी किसी न किसी तरह की वैश्विक कार्यप्रणाली की जरूरत होगी ही, ताकि वे इन प्रौद्योगिकियों को आत्मसात कर सकें। भारत की ओर से यह एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव है।"
लेकिन पश्चिमी देशों का कहना है कि इन प्रौद्योगिकियों के लिए सरकारों के पास बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) नहीं होता है और यह प्रवर्तकों के हितों को भी नुकसान पहुंचाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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