सुरक्षा हालात गंभीर, खतरों से निपटने के लिए तैयार रहें : प्रधानमंत्री (लीड-1)

तीनों सेनाओं के कमांडरों के एक संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारे निकट पड़ोसी देशों में सुरक्षा की स्थिति बदतर हुई है। सभी प्रकार के खतरों का सामना करने के लिए हमारे सैन्य बलों को तैयार रहना चाहिए। हमारे जवानों का प्रशिक्षण ऐसा होना चाहिए कि वे कहीं भी, कभी भी और कैसी भी परिस्थिति में अपना काम कर सके। गैर-पारम्परिक खतरों से निपटने की क्षमता पर उन्हें खास ध्यान देना चाहिए।"

प्रधानमंत्री ने हालांकि पाकिस्तान में हाल में हुए आतंकवादी हमलों और अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते खतरों का सीधे तौर पर जिक्र तो नहीं किया लेकिन कहा कि मुंबई में हुई 26/11 की घटना ने आतंकवाद के घातक आयामों और देश की सुरक्षा को गैरपारम्परिक खतरों की भयावहता को साबित किया है।

उन्होंने कहा, "आतंकवाद के कारोबार में राजकीय और गैर राजकीय ताकतें शामिल हैं। भारत एक लोकतांत्रिक और खुले विचारों वाला देश है, इसलिए आतंकवाद का खतरा कभी-कभी यहां बहुत भयावह दिखता है। इसके मद्देनजर हमें अपनी रक्षा प्रणाली को और मजबूत करना होगा ताकि सभी प्रकार के आंतकवादी खतरों से निपटा जा सके।"

उन्होंने कहा, "इस प्रकार के खतरों से निपटने के लिए हमें तैयार रहने की जरूरत है। लेकिन हमें छोटी-मोटी प्रतिक्रिया करने से बचना चाहिए।"

खुफिया और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर जोर देते हुए मनमोहन ने कहा कि केंद्र व राज्यों के बीच सहयोग भी बेहद अहम है।

इस सम्मेलन में रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी, केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम, विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा सहित तीनों सेनाओं के प्रमुख भी उपस्थित थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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