आईआईटी प्रवेश परीक्षा के लिए 80 प्रतिशत अंक जरूरी नहीं : सिब्बल (लीड-1)
सिब्बल ने संवाददाताओं को बताया, "संयुक्त प्रवेश परीक्षा (आईआईटी-जेईई) में शामिल होने की पात्रता आईआईटी द्वारा निर्धारित की जाती है। इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती। यदि कोई ऐसी रिपोर्ट आई हो जिसमें कहा गया हो कि 12वीं की परीक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले छात्रों को ही जेईई में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी, तो वह रिपोर्ट निराधार है।"
इसके पहले सिब्बल ने सोमवार को कहा था कि आईआईटी प्रवेश प्रक्रिया में 12वीं कक्षा के अंकों को ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि आईआईटी की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों की वर्तमान पात्रता को 60 प्रतिशत अंक से बढ़ा कर 80 से 85 प्रतिशत कर देनी चाहिए। सिब्बल ने यह टिप्पणी यहां आईआईटी काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता करते हुए की थी।
सिब्बल ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि आईआईटी काउंसिल द्वारा केवल यह निर्णय लिया गया है कि जेईई को युक्तिसंगत बनाने के लिए आईआईटंी की ओर से अगले वर्ष जनवरी महीने में एक रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
सिब्बल ने कहा, "पात्रता मानदंड का निर्धारण करना आईआईटी की जिम्मेदारी है। आईआईटी द्वारा ही इस बात पर विचार किया जाएगा कि 12वीं की परीक्षा को कितना महत्व दिया जाए।"
सिब्बल ने यह भी कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पूरे मुद्दे पर सवाल करते हुए उन्हें एक पत्र लिखा है, जिसके जवाब में एचआरडी मंत्रालय ने कहा है कि आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है।
आईआईटी काउंसिल की बैठक में सिब्बल ने कहा कि वह मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाओं के लिए पेशेवर कोचिंग से भी मुक्ति चाहते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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