हिंसा बंद होगी, तभी नक्सलियों से बातचीत संभव : चिदंबरम

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों के एक संगठन-'सिटीजंस इनिशिएटिव फॉर पीस' (सीआईपी) द्वारा मध्यभारत में माओवादियों के खिलाफ की जाने वाली हिंसापूर्ण कार्रवाई को बंद करने की अपील के जवाब में चिदंबरम ने यह बात कही। सीआईपी ने संघर्षविराम की मांग करते हुए नक्सलियों से सारे दुराभाव भुलाकर बातचीत के लिए आगे आने की अपील की।

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और सीआईपी के सदस्य रवि राय को संबोधित एक पत्र में चिदंबरम ने कहा, "सरकार नक्सलियों से बातचीत के लिए तैयार है। हम राज्य सरकारों द्वारा तय रास्तों के आधार पर उनसे बातचीत करेंगे। हम चाहते हैं कि इस मसले का हल बातचीत से निकले।"

चिदंबरम ने कहा कि सरकार को नक्सलियों से बातचीत करने में कोई गुरेज नहीं है, लेकिन उन्हें उन इलाकों में हिंसा बंद करनी होगी, जहां उनकी पैठ है।

अपने पत्र में चिदंबरम ने कहा, "मैं आपका ध्यान शीर्ष नक्सली नेता मुप्पाला लक्ष्मण राव (गणपति) और मालोजुला कोटेश्वर राव (किशनजी) के उन बयानों की ओर आकर्षित करना चाहता हूं, जिनमें उन्होंने बार-बार हिंसा को सही ठहराते हुए अपनी कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।"

उधर, गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अर्धसैनिक बलों के 75,000 जवानों को भेजने का फैसला किया है। ऐसा माना जा रहा है कि नक्सलियों के विरुद्ध सरकार की यह कार्रवाई नवंबर में शुरू हो जाएगी। शुरुआती चरण में छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा और महाराष्ट्र के छह जिलों में यह कार्रवाई की जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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