दो कंपनियों नहीं, दो भाइयों के बीच है रिलायंस गैस विवाद : सर्वोच्च न्यायालय
सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन, न्यायाधीश आर. वी. रवींद्रन और न्यायाधीश पी. सथाशिवम की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा, "यह विवाद दो देशों के समान है, जहां उनकी जनता के बीच कोई लड़ाई नहीं होती।"
उद्योगपति मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्री की ओर से अदालत में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे की दलील पर खंडपीठ ने कहा, "यह लड़ाई दो लोगों के बीच है जो देश में शीर्ष पर हैं। लेकिन इस लड़ाई को आम लोगों से जोड़ा जा रहा है।"
दो घंटे की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने यह भी कहा कि इस मामले की प्रकृति व्यक्तिगत है।
अदालत ने इस मामले में मीडिया से भी संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि न्यायाधीशों की टिप्पणी को उनके विचार के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्री की दलील पूरी नहीं हो सकी और बुधवार को भी यह जारी रहेगी।
गौरतलब है कि कृष्णा-गोदावरी बेसिन से निकलने वाली गैस को लेकर रिलायंस इंडस्ट्री और उद्योगपति अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले समूह के बीच विवाद है। अनिल अंबानी समूह वर्ष 2005 में हुए समझौते के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्री से 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से 2.8 करोड़ टन गैस की प्रतिदिन आपूर्ति करने की मांग कर रहा है जबकि रिलायंस इंडस्ट्री का कहना है कि वह 4.20 डॉलर प्रति यूनिट के हिसाब से गैस बेचेगी।
इस मामले में बंबई उच्च न्यायालय ने अनिल अंबानी के पक्ष में फैसला सुनाया था जिसे रिलायंस इंडस्ट्री ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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