हड्डियों का पुनर्निर्माण करेगी नई जैव तकनीक

यह सब ठीक उसी तरह संभव हो सकेगा, जिस तरह एक छिपकली अपने मरे हुए ऊतकों को फिर से हासिल कर लेती है। आपने देखा होगा कि पूंछ के कट जाने के बाद भी छिपकली मरती नहीं और कुछ समय बाद उसकी दूसरी पूंछ निकल जाती है।

तेल अवीव विश्वविद्यालय के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर मेइताल जिल्बेरमैन ने पानी में घुलनशील और जैविक रूप से सक्रिय रेशों (फाइबरों) की मदद से यह तकनीक विकसित करने में सफलता हासिल की है।

जिल्बेरमैन का शोध जारी है और वह दावा करती हैं कि आने वाले दिनों में वह ऐसी तकनीक भी विकसित कर लेंगी, जिसकी मदद से दूसरी तरह के ऊतकों मसलन, मांसपेशियों, खून की नलिकाओं और यहां तक की चमड़ी को फिर से विकसित करने में सफलता हासिल की जा सकेगी।

जिल्बेरमैन की इस तकनीक का उपयोग कॉस्मेटिक सर्जरी के क्षेत्र में भी किया जा सकेगा। जो लोग अपनी ठुड्डी या फिर गालों की हड्डियों को विकसित करने के लिए सिलिकॉन सर्जरी कराते हैं उन्हें यह सलाह दी जाएगी कि वे इस तकनीक के माध्यम से नए तरह की ठुड्डी और गालों की हड्डी या फिर अच्छे आकार के होठ विकसित करें।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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