नेपाल के पूर्व राजा को अदालत से मिली राहत
एक साल पहले नेपाल में हुए ऐतिहासिक चुनाव ने यहां के राजतंत्र को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। चुनाव के बाद अपदस्थ हुए राजा को अपना शाही नारायणहिती महल छोड़ना पड़ा था और वह काठमांडू घाटी के बाहरी इलाके में स्थित ग्रीष्मकालीन महल में रहने के लिए चले गए थे।
गठबंधन सरकार के अस्तित्व में आने के बाद से 62 वर्षीय ज्ञानेंद्र जून 2008 से अपने नागार्जुन महल में सामान्य जीवन गुजार रहे हैं।
राजा को नारायणहिती महल छोड़कर ग्रीष्मकालीन महल में रहने को मजबूर करने के सरकारी फैसले की काफी आलोचना हुई थी और लोगों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया था।
लोगों के विरोध प्रदर्शन के बीच एक नेपाली वकील भूपेंद्र पोडेल ने उच्चतम न्यायालय में एक अपील दायर की थी। अपील में उन्होंने कहा था कि चुनाव के बाद राजा ज्ञानेंद्र एक आम आदमी बन गए हैं और उन्हें नागार्जुन महल में रहने का अधिकार नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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