संयुक्त अभ्यास : भारत कमांडो प्रशिक्षण चाहता है, अमेरिका की नजर व्यापार पर (लीड-1)
आगरा, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। आगरा में भारतीय-अमेरिकी वायु सेना का छठां वार्षिक संयुक्त अभ्यास सोमवार से शुरू हो गया। इस अभ्यास के जरिए जहां भारत अपने विशेष कमांडो बल के लिए अधिक सामरिक ज्ञान चाहता है तो वहीं दूसरी ओर अमेरिका अपने परिवहन विमान के लिए और ठेके पाने पर आंखे गड़ाए हुए है।
कोप इंडिया अभ्यास के प्रभारी, एयर कमोडोर शौविक रॉय ने कहा, "विशेष अभियान को अंजाम देने की क्षमता और अवधारणाओं की पुष्टि करने के लिए आईएएफ (भारतीय वायु सेना) को अमेरिकी वायु सेना के विशेष सामरिक बल के साथ एक छद्म प्रतिकूल वातावरण में प्रशिक्षित किया जाएगा।" यह अभ्यास 24 अक्टूबर को समाप्त होगा।
रॉय ने कहा, "वायु सेना रक्षकों को नए सामरिक क्षेत्रों का ज्ञान दिया जाएगा। यह ज्ञान रक्षकों को अपने भविष्य के सामरिक दर्शन और प्रशिक्षण प्रारूप को संवारने में और उपकरणों में सुधार लाने में मददगार साबित होगा।"
देश भर में वायु सेना की संपत्तियों की सुरक्षा करने के मकसद से वर्ष 2004 में वायु सेना रक्षक की स्थापना की गई थी। वायु सेना रक्षक का बेस फिलहाल नई दिल्ली के बाहरी हिस्से में स्थित हैं।
वायु सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस बात का अध्ययन किया जाएगा कि अमेरिकी विशेष सामरिक बल अभ्यास के दौरान कैसे जवाबी कार्रवाई करता है और विभिन्न स्थितियों में किस तरह प्रदर्शन करता है।
वायु सेना की ओर से अभ्यास में पांच एएन-32 मध्यम दर्जे के परिवहन विमान, एक आईएल-76 भारी परिवहन विमान, दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर, एक चेतक हेलीकॉप्टर और 250 वायु सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। अमेरिकी दल में 150 से अधिक वायुसैनिक हैं। इसके अलावा तीन सी-130 एच हरकुलस, एक सी-17 ग्लोबमास्टर-3 और एक सी-130-जे विमान भी अमेरिकी दल में शामिल हैं।
भारत में अमेरिकी राजदूत टिमोथी जे.रोमर ने कहा है कि यह अभ्यास इस बात का सटीक उदाहरण है कि अमेरिकी और भारतीय वायु सेनाएं सूचना के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और अपनी पेशेवर क्षमता को धार देने में किस तरह मिल कर काम कर रही हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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