सर्वोच्च न्यायालय मंगलवार से रिलायंस गैस मामले की सुनवाई करेगा (लीड-1)
यह विवाद कृष्णा-गोदावरी बेसिन से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर है। कृष्णा-गोदावरी बेसिन का आवंटन रिलायंस इंडस्ट्रीज को 2005 में उस समय किया गया था, जब यह औद्योगिक समूह विभाजित नहीं हुआ था। इस औद्योगिक समूह की स्थापना दिवंगत धीरूभाई अंबानी ने की थी।
आपस में हुए पारिवारिक समझौते के आधार पर अनिल अंबानी की कंपनी कृष्णा गोदावरी बेसिन से 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से 17 सालों तक प्रतिदिन 2.80 करोड़ यूनिट गैस की मांग कर रही है। इस बारे में बांबे उच्च न्यायालय ने जून महीने में अनिल अंबानी के पक्ष में फैसला सुनाया था।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इस मामले में सरकार भी एक पक्ष बन गई है। सरकार का कहना है कि प्राकृतिक गैस सरकार की संपत्ति है और इस पर दो प्रतिद्वंद्वी औद्योगिक घराने झगड़ नहीं सकते।
गौरतलब है कि अभी मुश्किल से 10 दिन हुए हैं, जब अनिल अंबानी ने दो तीर्थस्थलों की यात्रा से लौटने के बाद मामले को सौहाद्र्रपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए मुकेश अंबानी को संदेश भेजा था।
लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा था कि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति और उसकी कीमत तय करने का मामला दोनों कंपनियों के बीच विवाद की सीमा से आगे निकल चुका है और उसे अब केवल अदालत में ही सुलझाया जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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