जलवायु परिवर्तन पर जयराम रमेश के सुझाव का विशेषज्ञों ने किया विरोध

उल्लेखनीय है कि सोमवार को एक समाचार पत्र ने यह खुलासा किया कि रमेश ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका को शामिल करने के लिए भारत को क्योटो संधि की परवाह नहीं करने और जी-77 में शामिल देशों से संबंध तोड़कर जी-20 में शामिल होने का सुझाव दिया है।

जलवायु परिवर्तन पर बातचीत के लिए भारत की ओर से गठित किए गए दल के एक वरिष्ठ सदस्य ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "यह बहुत ही आश्चर्यजनक है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि क्या हो रहा है।"

उन्होंने कहा, "बैंकाक में जलवायु परिवर्तन पर हुई अंतिम बैठक में हमने लिखित तौर पर स्पष्ट किया था कि क्योटो संधि की हर हाल में रक्षा होनी चाहिए। खुद मंत्री ने यह बात कही थी। अब मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि वह अपनी बात से पीछे कैसे हट सकते हैं और इस प्रकार की बात कह सकते हैं।"

उन्होंने कहा, "मंत्री का यह सुझाव देश हित के खिलाफ है। इससे देश का विकास बाधित होगा।"

विज्ञान और पर्यावरण केंद्र की निदेशक सुनीता नारायण ने कहा, "अमेरिका को शामिल करने के लिए जलवायु परिवर्तन पर भारत के रुख में बदलाव का विचार फालतू और अपरिपक्व है।"

उन्होंने कहा, "अमेरिका ही विश्व में सबसे अधिक प्रदूषण फैलाता है और उसने जलवायु परिवर्तन के संबंध में कोई भी कारगर कदम नहीं उठाया है। इस मामले में अमेरिका का ओबामा प्रशासन पूर्व बुश प्रशासन से भिन्न नहीं है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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