रंग बिरंगी आतिशबाजी के प्रयोग पर विशेषज्ञों की चेतावनी
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के मुताबिक राजधानी में इस बार दीपावली के मौके पर वायु और ध्वनि प्रदूषण में पिछले साल के मुकाबले कमी आई है। हालांकि गैसीय प्रदूषणों में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों ने इसके लिए रंग बिरंगी आतिशबाजी को जिम्मेदार ठहराया है। रंगीन आतिबाजी में धातु आक्ससाइड होते हैं जो अधिक कार्बन मोनोक्साइड और आक्साइड ऑफ नाइट्रोजन का उत्सर्जन करते हैं।
विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (सीएसई) के थिंक टैंक कहे जाने वाले विवेक चट्टोपाध्याय ने आईएएनएस से बातचीत में कही, "लोग अब आवाज करने वाले पटाखों की बजाय रोशनी वाले पटाखों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। रोशनी वाले पटाखों में धातुओं का इस्तेमाल होता है। इनसे धातु के धुएं उत्सर्जित होते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य के लिए।"
दीपावली के मौके पर डीपीसीसी ने वायु प्रदूषण पर नजर रखने के लिए राजधानी के 40 स्थानों को चुना वहीं उसने ध्वनि प्रदूषण पर नजर रखने के लिए 10 स्थानों को चुना था। इस दौरान राजधानी के 22 स्थानों पर नाइट्रोजन आक्साइड में वृद्धि दर्ज की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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