मुल्लईपेरियार बांध ब्रह्मपुत्र पर चीन द्वारा बनाए जा रहे बांध की तरह : जयललिता (लीड-1)
जयललिता ने रविवार को कहा कि जिस आधार पर भारत सरकार चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए जा रहे बांध का विरोध कर रही है, उस आधार पर तमिलनाडु को भी मुल्लईपेरियार बांध का विरोध करने का पूरा हक बनता है।
उल्लेखनीय है कि भारत ने यह कहते हुए इस चीनी कोशिश का विरोध किया है कि इससे देश के कई राज्यों की पारिस्थितिकी प्रभावित होगी।
जयललिता ने एक बयान जारी कर कहा, "नदी के जल बंटवारे को लेकर यदि एक देश दूसरे देश का विरोध कर सकता है तो क्या इसी आधार पर तमिलनाडु को अपने पड़ोसी राज्य का विरोध करने का हक नहीं है।"
उन्होंने कहा, "क्या केरल और तमिलनाडु भारत के राज्य नहीं हैं। क्या देश के प्रधानमंत्री और देश के वन एवं पर्यावरण मंत्री देश और राज्य से जुड़े एक जैसे ही मुद्दों पर अलग-अलग मापदंड नहीं अपना रहे हैं।"
जयललिता ने दावा किया कि केरल द्वारा मुल्लईपेरियार पर नया बांध बनाने से तमिलनाडु के पांच जिले प्रभावित होंगे।
उन्होंने कहा कि केरल ने नया बांध बनाने के लिए सर्वेक्षण का 90 फीसदी काम पूरा कर लिया है। शेष काम दो महीने में पूरा कर लिया जाएगा। यह निर्माण कार्य तमिलनाडु की जनता के हित में नहीं है। इसलिए राज्य की सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) को केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील सरकार (संप्रग) से समर्थन वापस ले लेना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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