त्रिनिदाद और टोबैको में दीवाली पर जले लाखों दीये
पोर्ट-ऑफ-स्पेन, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। त्रिनिदाद और टोबैको में भारतीय मूल के लोगों ने दीवाली का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर की गई रंगबिरंगी आतिशबाजी से आकाश जगमगा उठा, घरों में जलाए गए लाखों दीयों से पूरा वातावरण रौशन हो उठा। इस देश में खेतिहर मजदूर के रूप में पहुंचे भारतीय प्रवासियों की यह 164वीं दिवाली थी।
दीवाली के दिन देश में सार्वजनिक अवकाश था। दीवाली के दिन अवकाश का निर्णय वर्ष 1966 में लिया गया था।
उत्तर प्रदेश व बिहार से गóो के खेत में काम करने के लिए वर्ष 1845 और 1917 के बीच वहां पहुंचे भारतीयों के लिए दीवाली पर्व कई हिंदू त्योहारों का ध्वज वाहक है। यहां मनाए जाने वाले अन्य हिंदू त्योहारों में नवरात्रि, रामलीला, कार्तिक स्नान, शिवरात्रि, कृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और रामनवमी शामिल है।
यहां के हिंदू दीवाली के पहले कई सप्ताहों से मदिरा सेवन बंद कर देते हैं। यहां की 13 लाख आबादी का 24 प्रतिशत हिस्सा भारतीय मूल के हिंदुओं का है। परंपरा के अनुसार दीवाली के दिन मित्र, पड़ोसी और रिश्तेदार एक-दूसरे के घरों आपस में मिलने-जुलने के लिए जाते हैं और भारतीय व्यंजन व मिठाइयों का आदान-प्रदान करते हैं। यहां तक कि मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोग भी रोशनी के इस त्योहार में शरीक होते हैं।
सभी जातीय व सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग साड़ियां, सलवार-कुर्ता और अन्य भारतीय परिधानों में सज-धज कर अपने प्रवासी भारतीय होने के प्रति एकता प्रदर्शित करते हैं।
सरकार के कई मंत्री और विभाग, सरकारी एजेंसियां, निगम और प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ओर से भव्य दीवाली समारोहों का आयोजन किया जाता है।
देश के पांचों ईस्ट इंडियन रेडियो स्टेशन पिछले कई दिनों से धार्मिक कार्यक्रमों का प्रसारण कर रहे हैं। टेलीविजन स्टेशन भी इस तरह के कुछ कार्यक्रमों का प्रसारण कर रहे हैं।
त्रिनिदाद और टोबैको के राष्ट्रपति प्रोफेसर मैक्सवेल रिचर्ड्स ने अपने दीवाली संदेश में आह्वान किया है, "उन नकारात्मक भावनाओं को मिटा दें जो हमारे बीच रिश्तों में घर कर गईं हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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