जलवायु परिवर्तन के अध्ययन के लिए दो उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जाएगा
नायर ने यहां संवाददाताओं को बताया, "ये उपग्रह वर्ष 2010 और 2011 में लांच किए जाएंगे। पहला 50 किलोग्राम का छोटा उपग्रह होगा, जो वातावरणीय अनुसंधान करेगा। दूसरा सुदूर संवेदी उपग्रह होगा जो मीथेन और कॉर्बन डाईऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की निगरानी करेगा।"
इन उपग्रहों की लांचिंग के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के कारण होने वाले जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के अध्ययन की इस तरह की आधुनिक सुविधा उपलब्ध है।
केंद्रीय पर्यावरण व वन राज्यमंत्री जयराम रमेश ने कहा है, "केवल जापान और कुछ यूरोपीय देशों ने ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की निगरानी हेतु विशेष उपग्रह लांच किए हैं। वर्ष 2011 तक भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा। उस समय तक हमारे पास ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के अध्ययन के लिए अपना खुद का उपग्रह होगा।"
उपग्रह प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से यह भी साफ हो जाएगा कि भारत ग्लोबल वार्मिग और पर्यावरण की हिफाजत के प्रति गंभीर है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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