दीवाली पर रोशन नहीं हुए अपहृतों के घर
पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक इस साल जनवरी से जुलाई के बीच बिहार में 45 लोगों का अपहरण हुआ है। पिछले साल इस दौरान 32 लोगों का अपहरण किया गया था।
तीन महीने पहले बिहार सरकार ने आधिरिक तौर पर स्वीकार किया था कि 2001 से 2009 के बीच 2167 बच्चों का अपहरण हुआ है। इनमें से 1752 को बरामद कर लिया गया। 75 को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है जबकि 340 का अब तक कोई पता नहीं चल सका है।
वर्ष 2007 में स्कूल जाते वक्त अपहृत किए गए 12 साल के आकाश की मां अंजू पांडेय ने कहा, "हम पिछले तीन साल से दीवाली नहीं मना रहे हैं। मेरा बच्चा यहां नहीं है, तब दीवाली मनाने का सवाल ही पैदा नहीं होता।"
पटना, बेगूसराय, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, छपरा और अन्य जिलों में कई ऐसे परिवार हैं जो दीवाली की खुशियों के बीच अपने लाड़लों की खैरियत की दुआ करते रहते हैं।
इन लोगों को इस बात का बेहद दुख है कि 2005 में सत्ता में आने के बाद तीन महीने के भीतर राज्य को अपराधमुक्त करने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री नितीश कुमार भी इस मामले में अब कुछ नहीं कर रहे हैं।
राज्य में इन दिनों अपहरण की कई घटनाएं हो रही हैं। वकील, डॉक्टर, व्यापारी और समाज के अन्य अमीर लोग अपराधियों के निशाने पर हैं। यही कारण है कि हजारों पेशेवर लोगों ने बड़े शहरों का रुख किया है और अपने बच्चों को बोर्डिग स्कूलों में दाखिल कर दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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