यहां हर दीपावली पर होती है लड़ाई

गांववासी इसे पत्थरमार दिवाली कहते हैं। फैजगंज और बेहता गांवों के लिए यह एक परंपरा बन गई है।

बेहता गांव के निवासी श्रीचरण प्रकाश (61) ने आईएएनएस को बताया, "हमारे लिए पत्थरमार दिवाली एक खेल की तरह है। हम दूसरे गांव के अपने प्रतिद्वंद्वी पर निशाना साधते हैं और उन पर पत्थर फेंकते हैं।"

स्थानीय लोगों के अनुसार पत्थरमार दिवाली, दिवाली के एक दिन पहले सुबह तड़के से शुरू होती है और अगले दिन अपराह्न् समाप्त हो जाती है।

बेहता गांव के एक किसान मिशिरिख चौरसिया (31) ने कहा, "इस दौरान हम रात को अवकाश लेते हैं। दोनों गांवों के नागरिक खासतौर से पुरुष पत्थरमार दिवाली मनाने के लिए दोनों गांवों को अलग करने वाले खेतों में बड़ी संख्या में जमा हो जाते हैं।"

चौरसिया ने कहा, "हमारे हाथों में लाठियां होती हैं, जो कभी-कभी पत्थर फेंकने के दौरान बहुत करीब आ गए प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबले के काम आती हैं।"

ग्रामीणों का कहना है कि दोनों गांवों में पत्थरमार दिवाली पिछले 110 सालों से मनाई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार इस परंपरा की शुरुआत उनके पुरखों के बीच वर्चस्व की लड़ाई को लेकर हुई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+