'आयुर्वेद के प्रति लोगों में विश्वास पैदा करना जरूरी'
सिंह गुरुवार को यहां हरिश्चन्द्र माथुर लोक प्रशिक्षण संस्थान (ओ.टी.एस.) के भगवत सिंह मेहता सभागार में आयोजित धन्वन्तरि जयन्ती समारोह व संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मनुष्य के स्वास्थ्य व मूल्यों का ह्रास हो रहा है जिसको दूर करने के लिए हमें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। सिंह ने कहा कि राज्य सरकार आयुर्वेद विभाग की कमियों को दूर कर इसे सशक्त बनाने का हर सम्भव प्रयास कर रही है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए आयुर्वेद एवं चिकित्सा शासन उप सचिव शमीम अख्तर ने कहा कि शरीर स्वस्थ हो तो सब कुछ अच्छा होता है व कहावत भी है 'एक तन्दुरुस्ती हजार नियामत'। उन्होंने कहा कि हमारा आहार विहार ऋतु के अनुसार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के प्रति लोगों की भ्रांतियों को दूर करना होगा। आयुर्वेद में पंचकर्म विषय पर उन्होंने कहा कि इस विधि से रोगों को दूर करने में मदद मिलती है। शोधन से रोग जड़ से समाप्त हो जाता है। वर्तमान में इसका प्रयोग विदेशों में हो रहा है। हमें पंचकर्म की शुद्ध पद्धति को अपनाना चाहिए।
समारोह में मुख्य वक्ता, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के डॉ. श्रीकृष्ण खांडल ने आयुर्वेद चिकित्सा में पंचकर्म के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि पंचकर्म एक आयुर्वेद की विधा है जिसके अनेक लाभ हैं। पंचकर्म देश, काल, समय, स्थिति को देखकर करना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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