महिला विधेयक पर राष्ट्रपति को रोजाना एक पत्र भेजा जाएगा

इस अभियान का नेतृत्व कर रहीं सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक रंजना कुमारी ने कहा है, "महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने की दिशा में सरकार की धीमी प्रगति से हम थक गए हैं। हमने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से बहुत उम्मीदें लगाई थी कि वह इस विधेयक को पारित करा देगी, लेकिन आश्चर्य है कि ऐसा अभी तक नहीं हो पाया है, जबकि यह मुद्दा सरकार के 100 दिन के एजेंडे में शामिल है।"

रंजना कुमारी ने कहा, "महिला संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाने का अनोखा तरीका ढूंढ़ निकाला है। हमारी ओर से हर रोज राष्ट्रपति को देश भर से पत्र भेजे जाएंगे। ये पत्र सरकार को जगाने के लिए नियमित स्मरणपत्र का काम करेंगे।"

महिला आरक्षण विधेयक में संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव है।

पत्रों के अलावा विधेयक को पारित कराने के लिए दबाव बनाने हेतु पूरे देश से आवाज उठाने व समर्थन हासिल करने के लिए इंटरनेट का भी व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।

रंजना कुमारी ने कहा है, "इस अभियान के समर्थन में हम फेसबुक जैसी सामाजिक नेटवर्किं ग साइट्स पर अकाउंट तैयार करेंगे तथा ब्लॉग्स और ई-समूहों को भी तरोताजा करते रहेंगे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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