प्रधानमंत्री के अरूणाचल दौरे पर चीन की आपत्ति खारिज (राउंडअप)
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम 'भारत-बांग्लादेश संवाद' के मौके पर संवाददाताओं से कहा, "इसमें कुछ भी नया नहीं है। इसके पहले जब मैं विदेश मंत्री था तो चीन ने मेरे तवांग दौरे पर भी आपत्ति की थी।"
इसके पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने दिन में कहा था, "चीनी विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर हम अपनी निराशा और चिंता प्रकट करते हैं क्योंकि इससे सीमा मुद्दे पर जारी बातचीत की प्रक्रिया में कोई मदद नहीं मिलेगी।"
विष्णु प्रकाश ने कहा कि अरूणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और यहां के नागरिक भारतीय लोकतंत्र की मुख्यधारा में हिस्सा लेकर अपने को गौरवान्वित महसूस करते हैं।
विष्णु प्रकाश ने कहा कि चीन, भारत सरकार की इस स्थिति से अच्छी तरह परिचित है।
इसी बीच विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने कहा, "मैंने संसद में कहा है कि अरूणाचल प्रदेश भारत का एक अभिन्न हिस्सा है।"
कृष्णा की टिप्पणी ऐसे समय आई, जब चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "चीन की गंभीर चिंताओं को दरकिनार करते हुए भारतीय नेता द्वारा इस विवादित क्षेत्र का दौरा किए जाने से चीन बेहद असंतुष्ट है।" यद्यपि, इस बयान में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है।
उल्लेखनीय है कि मनमोहन सिंह ने तीन अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के प्रचार के सिलसिले में अरूणाचल प्रदेश का दौरा किया था।
उधर बीजिंग में चीन के विदेश विभाग के प्रवक्ता मा झाऊक्सू ने कहा है कि भारत और चीन ने आधिकारिक तौर पर अपनी सीमा का निर्धारण नहीं किया है और भारत-चीन सीमा के पूर्वी हिस्से को लेकर चीन का रुख दृढ़ और स्पष्ट है।
झाऊक्सू ने कहा है, "हमारी मांग है कि भारतीय पक्ष चीन की गंभीर चिंताएं दूर करे और विवादास्पद क्षेत्र में गड़बड़ी पैदा न करे ताकि दोनों देशों के बीच स्वस्थ संबंधों का विकास हो सके।"
ज्ञात हो कि बीजिंग ने वर्ष 2003 में सिक्किम पर तो अपना दावा छोड़ दिया था लेकिन उसने कहा था कि लगभग पूरा अरूणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है। अरूणाचल प्रदेश की 1,030 किलोमीटर लंबी खुली सीमा चीन के साथ लगी हुई है।
इधर, प्रधानमंत्री के अरूणाचल दौरे पर चीनी सरकार के पक्ष से अवगत कराने के लिए भारत में चीन के राजदूत झांग यान ने भी मंगलवार को नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय से बातचीत की।
यहीं पर विष्णु प्रकाश ने कहा कि भारत चीन के साथ दीर्घकालिक मतभेदों को निष्पक्ष, उचित और आपस में स्वीकार्य तरीके से सुलझाने को प्रतिबद्ध है।
एक भारतीय सांसद ने भी मनमोहन सिंह के अरूणाचल दौरे पर चीनी आपत्ति की निंदा की है।
अरूणाचल प्रदेश से कांग्रेस पार्टी के सांसद तकाम संजय ने आईएएनएस से कहा है, "हमारे प्रधानमंत्री के अरूणाचल प्रदेश दौरे पर चीन की यह आपत्ति पूरी तरह निंदनीय है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications