मदर टेरेसा की अस्थियों के लिए अल्बानिया की मांग खारिज (लीड-1)
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत सरकार ने अल्बानिया सरकार की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें उसकी ओर से मदर टेरेसा की अस्थियों को लौटाने के लिए कहा गया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि मदर टेरेसा भारतीय नागरिक थीं। सरकार के इस निर्णय का देश में स्वागत हुआ है।
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने मंगलवार को आईएएनएस से कहा कि मदर टेरेसा भारतीय नागरिक थीं, लिहाजा उनकी अस्थियों को वापस लौटाने का प्रश्न ही नहीं उठता।
अधिकारी ने कहा, "मदर टेरेसा एक भारतीय नागरिक थीं। इससे ज्यादा और कुछ भी नहीं कहा जा सकता।"
भारतीय कैथोलिक बिशप कांफ्रेंस (सीबीसीआई) ने भारत सरकार के इस बयान का स्वागत करते हुए कहा है कि चर्च चाहेगा कि मदर टेरेसा की अस्थियां देश में ही रहें।
सीबीसीआई के प्रवक्ता बाबू जोसेफ ने मंगलवार को कहा, "कैथोलिक चर्च विदेश मंत्रालय के उस बयान का हृदय से स्वागत करता है जिसमें उसने कहा है कि मदर टेरेसा भारतीय नागरिक थीं। हम भी चाहेंगे कि उनकी अस्थियां भारत में ही रहें।"
चर्च ने कहा है, "मदर टेरेसा ने जीवनभर अपनी गतिविधियों के जरिए भारतीय समाज के हर वर्ग के साथ एक मजबूत रिश्ता कायम किया था और देश का हर नागरिक उनका सम्मान करता था। मदर टेरेसा और भारतीयों के बीच मां-बेटे जैसा रिश्ता था, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।"
सरकार का यह कदम कोलकाता के तमाम निवासियों के लिए भी आनंददायक होगा, क्योंकि अल्बानिया की इस मांग को लेकर वे व्यथित थे।
मैग्सेसे पुरस्कार विजेता साहित्यकार महाश्वेता देवी ने आईएएनएस से कहा, "वह अल्बानिया की मूल निवासी हो सकती हैं। लेकिन कोलकाता में किए अपने कामों के कारण ही वह मदर टेरेसा बन पाई थीं। वह भारत आईं और कोलकाता को उन्होंने अपना घर व कार्यक्षेत्र चुना। वह यहां अपनी पसंद से रहीं। उनका निधन भी यहीं हुआ। इसलिए मैं सोचती हूं कि उनकी स्मृति के सम्मान में उनकी अस्थियों को यहीं रहने की अनुमति दी जानी जाहिए।"
ज्ञात हो कि मदर टेरेसा अल्बानिया की मूल निवासी थीं, 26 अगस्त 1910 को उनका वहां जन्म हुआ था। अल्बानियाई प्रधानमंत्री सैली बेरिशा ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि मदर टेरेसा की अस्थियां अगस्त 2010 में उनकी 100वीं जयंती तक अल्बानिया को वापस कर दी जानी चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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