कम समय में हो सकेगी स्तन कैंसर के खतरों की पहचान
टोरंटो विश्वविद्यालय (यू-टी) की नोहा मूसा का कहना है, "स्तन के ऊतकों में ओइस्ट्रोजन हार्मोन और इसके चयापचय से बनने वाले उत्पादों की मात्रा बढ़ जाने की वजह से स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।"
मूसा ने कहा, "परम्परागत तकनीकों से स्तन में ओइस्ट्रोजन की मात्रा ज्ञात करना महिलाओं के लिए खतरनाक होता है क्योंकि इसमें ऊतकों के अधिक बड़े नमूने चाहिए।"
यू-टी वैज्ञानिकों के समूह ने एक नई तकनीक 'डिजीटल माइक्रोफ्लूडिक्स' विकसित की है। जिसमें एक माइक्रोचिप की मदद से जांच की जाती है। इस तकनीक को 'लैब-ऑन-ए-चिप' भी कहते हैं।
यू-टी में 'व्हीलर माइक्रोफ्लूडिक्स लैब' के निदेशक एरोन व्हीलर कहते हैं, "हमने पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल चिकित्सालय में आए रक्त, सीरम और स्तन कैंसर के ऊतकों के नमूनों की जांच में किया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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