कला उत्सव में छायी तंजानिया की जनजातीय संस्कृति

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के तत्वावधान में यह आयोजन हुआ था।

वाद्य यंत्रों की मोहक धुनों के साथ यह कार्यक्रम शुरू हुआ। जहां पारंपरिक तंजानियाई ड्रमों 'मसोन्डो' और 'चापुओ' के साथ जाईलोफोन 'म्रिम्बा' पर संगीत की स्वरलहरियां निकल पड़ीं। इसके बाद भारत-अफ्रीका के रिश्ते की मजबूती के गीत और पूर्वी अफ्रीका में रहने वाली विभिन्न जनजातियों के पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए गए।

नर्तकों ने एक अग्नि-संतुलन नृत्य, एक मशाल नृत्य, पारंपरिक उत्सव, तलवारबाजी नृत्य की प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति को 'नागोमा' नाम दिया गया था।

तंजानिया के उच्च उप-आयुक्त अमोन मवामेनेन्जे ने आईएएनएस से कहा, "तंजानिया में करीब 120 जनजातियां हैं और प्रत्येक जनजाति की अपनी अलग संस्कृति है। ज्यादातर नृत्य उत्सवों व जन्म, शादी-ब्याह व ग्रामीण रीति-रिवाज समारोहों से जुड़े हुए हैं। नृत्य उतने ही पुराने हैं जितनी पुरानी ये जनजातियां हैं।"

'लुमुम्बा थियेटर' एक व्यावसायिक संगीत एवं नृत्य कंपनी है। 2002 में 'दार-एस-सलाम' में इसका गठन हुआ था।

आईसीसीआर के महानिदेशक वीरेंद्र गुप्ता ने आईएएनएस से कहा, "अफ्रीका से हमारा शताब्दियों पुराना संबंध है। भारत में अफ्रीकी संस्कृति की अधिक ग्राहिता है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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