हिटलर के समय कंपनी में बेगार की जांच करेगी पोर्श

स्टुटगार्ट, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। जर्मनी की कार निर्माता कंपनी पोर्श नाजी शासन के दौरान कंपनी में बलपूर्वक मजदूरी कराने के मामले की गंभीरता से जांच करेगी।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार कंपनी के अभिलेखों के अध्यक्ष ने इजरायल के समाचार पत्र 'हारेट्ज' को बताया कि पोर्श में जबरिया और बहुत कम पैसों पर काम कराने के मामले की जांच विदेशी विशेषज्ञों से कराने का विचार है।

पोर्श के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ने मान लिया था कि जबरिया मजदूरी के लिए मजबूर किए गए लोगों की संख्या मामूली थी लेकिन हाल ही में यह पता चला है कि ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक हो सकती है।

प्रवक्ता ने कहा कि मामले की जांच करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों को अध्ययन के लिए प्रासंगिक दस्तावेजों की जरूरत है।

इस मामले को एक पत्रकार उलरिच विहोफर ने नाजी युद्ध अपराधियों की किताबों का अध्ययन करने के बाद उजागर किया। अपने अध्ययन में विहोफर ने हिटलर के सत्ता में आने के बाद फर्डिनेंड पोर्श की भूमिका का अध्ययन किया है।

पत्रकार के अनुसार करीब 300 लोगों को पोर्श में जबरन मजदूरी के लिए बाध्य किया गया। बहरहाल अब तक पोर्श ने 50 लोगों को जबरन मजदूरी के लिए बाध्य किए जाने की बात स्वीकार की है। इनमें पोलैंड,रूस,हालैंड,फिनलैंड,बेल्जियम, चेक और इटली के नागरिक थे।

अभी तक जिन 11 लोगों ने अपील की है,उनमें से आठ को मुआवजा मिल चुका है। इसके लिए कंपनी ने एक जर्मन कोष को 50 लाख मार्क (25 लाख यूरो) का भुगतान किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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