नेपाल में हज यात्रियों की उम्र सीमा तय करने से मुसलमानों में नाराजगी

काठमांडू, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। नेपाल में मुस्लिम समुदाय ने सरकार के उस कदम का विरोध किया है, जिसमें हज यात्रियों के लिए उम्र सीमा निर्धारित कर मक्का जाने वाले यात्रियों की संख्या नियंत्रित करने की कोशिश की गई है। मुसलमानों ने सरकार के इस कदम के खिलाफ सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है।

मुसलमानों की ओर से विरोध की यह चेतावनी तब दी गई है, जब प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने नवंबर महीने में प्रस्तावित हज यात्रा के लिए 20 सदस्यीय हज समिति का गठन किया है।

दो दर्जन मुस्लिम संगठनों की प्रतिनिधि संस्था, एकीकृत मुस्लिम राष्ट्रीय संघर्ष समिति के संयोजक ताज मोहम्मद मियां के अनुसार हज समिति ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि 65 साल से अधिक उम्र वालों को हज यात्रा के लिए पासपोर्ट न जारी किए जाएं।

मियां ने आईएएनएस को बताया, "नेपाल से प्रति वर्ष लगभग 500 लोग हज यात्रा के लिए जाते हैं।"

मियां ने कहा है, "पिछले वर्ष 475 लोग हज यात्रा पर गए थे। उनमें से ज्यादातर की उम्र 65 साल से अधिक थी, उनमें 80 वर्ष की उम्र के लोग भी शामिल थे। नया आदेश एक तरह से हज यात्रा पर प्रतिबंध लगाने जैसा है। यह कदम इस्लाम विरोधी है, क्योंकि यह हर मुसलमान का सपना होता है कि जीवन में वह एक बार हज पर जरूर जाए।"

मियां ने कहा है कि भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे किसी भी दक्षिण एशियाई देश ने इस तरह का निर्देश नहीं जारी किया है।

मियां ने आगे कहा है, "मुसलमान इस प्रतिबंध के हटाए जाने तक अपना विरोध जारी रखेंगे। हम जिले के मुख्य अधिकारी के कार्यालयों का घेराव करेंगे और अन्य आंदोलनात्मक कदमों की भी घोषणा करेंगे।"

मुस्लिम समुदाय के दो लोगों ने रविवार को नई हज समिति के फैसले खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कहा है कि यह कदम संसदीय दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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