पाकिस्तानी अदालत ने सईद के खिलाफ आरोपों को खरिज किया (लीड-1)
अदालत के फैसले के बाद संवाददाताओं से बातचीत में सईद के वकील ए. के. डोगर ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मैंने अदालत में यह तर्क दिया कि पंजाब की प्रांतीय सरकार ने जेयूडी को प्रतिबंधित अातंकवादी संगठनों की सूची में शामिल नहीं किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा जेयूडी को पिछले साल आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के बाद उसे सिर्फ सरकार की निगरानी सूची में शामिल किया गया था। अदालत ने मेरा तर्क स्वीकार कर लिया।"
डोगर ने पिछले महीने सईद पर दर्ज दो ताजा मामलों के खिलाफ अदालत में अपील की थी।
ज्ञात हो कि गत 17 सितम्बर को फैसलाबाद की पुलिस ने सईद के खिलाफ दो मामले दर्ज किए थे। सईद पर आरोप था कि उसने अगस्त महीने में एक सभा में गैर मुस्लिमों के खिलाफ जेहाद छेड़ने और जेयूडी के लिए धन इकट्ठा करने का आह्वान किया था।
वर्ष 2001 की 13 दिसम्बर को भारतीय संसद पर हुए हमले के बाद जब लश्कर-ए-तैयबा पर प्रतिबंध लगा दिया गया था तब से उसने जेयूडी के बैनर तले काम करना आरंभ कर दिया था।
सईद को दिसम्बर 2008 में नजरबंद किया गया था। हालांकि लाहौर उच्च न्यायालय ने सबूतों के अभाव में उसे बरी कर दिया था। इसके बाद ऐसी खबरें आईं थी कि सईद को 21 सितम्बर 2009 को फिर नजरबंद कर दिया गया है। अगले ही दिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने इसकी पुष्टि भी की और कहा, "सबूतों के आधार पर तय किया जाएगा कि उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए।" लेकिन दो दिनों बाद 24 सितम्बर को पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक ने एक निजी भारतीय टेलीविजन चैनल से एक साक्षात्कार में कहा "यदि सबूतों से यह स्पष्ट हो जाएगा कि वह अपराधी है तो हम एक क्षण भी बर्बाद नहीं करेंगे और उसे गिरफ्तार कर लेंगे। लेकिन इसमें कुछ समय लगेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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