कथित बलात्कारियों को मुक्त करने के लिए अधीनस्थ अदालतों की खिंचाई

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने एक 15 वर्षीय किशोरी के साथ बलात्कार के दो आरोपियों को सिर्फ अपहरण का दोषी ठहराने के लिए पंजाब की एक निचली अदालत और वहां के उच्च न्यायालय की जम कर खिंचाई की है।

न्यायमूर्ति वी. एस. सिरपुरकर और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की पीठ ने इस मामले में पिछले सप्ताह दिए गए पंजाब की अदालतों के फैसलों पर नाराजगी जाहिर की है।

यह मामला वर्ष 1987 का है, जब पंजाब के नकोदर कस्बे के पुरूषोत्तम लाल और वेद प्रकाश ने अपने पड़ोसी की 8वीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी को अगवा कर लिया और उसके साथ मुंह काला किया। किशोरी के पिता द्वारा पुलिस में आपराधिक मामला दर्ज कराए जाने के कुछ दिनों बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया और किशोरी को उनके कब्जे से बरामद कर लिया गया।

सर्वोच्च न्यायालय की ओर से कहा गया है, "यह आरोप है कि किशोरी को लेकर फरार होने बाद दोनों ने उसे होशियारपुर में रखा था और वहां दोनों ने उसके साथ बलात्कार किया था। लेकिन कुछ रहस्यमय कारणों से दोनों को बलात्कार के लिए आरोपित नहीं किया गया, जो कि हमारी समझ से परे है।"

न्यायमूर्तिद्वय ने कहा, "सत्र न्यायाधीश के फैसले में हमने पाया है कि मामले को अपने क्षेत्राधिकार में लेने के लिए बलात्कार का आरोप हटा दिया गया। यह बात हमारी समझ से बिल्कुल परे है कि ऐसे मामले में किसी न्यायाधीश के सामने क्षेत्राधिकार की समस्या कैसे आ सकती है, जबकि किशोरी का अपहरण और उसके साथ बलात्कार दोनों एक ही अपराध के हिस्से थे।"

न्यायमूर्तिद्वय ने कहा है, "आरोपियों पर बलात्कार के अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया गया, जबकि दोनों को दंडित किए जाने की बिलकुल उपयुक्त स्थिति थी, क्योंकि किशोरी की उम्र भी 15 साल ही थी।"

निचली अदालत की ओर से बलात्कार के मामले को छोड़ देने के पीछे का एक कारण आरोपी की ओर से दायर एक याचिका को बताया गया है, जिसमें कहा गया था कि एक आरोपी ने किशोरी से शादी कर ली थी। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि यह जानकर हैरानी होती है कि अदालत ने पीड़िता से शादी की बात की पुष्टि करने की जरूरत ही नहीं समझी।

इस तरह निचली अदालत ने किशोरी के अपहरण के आरोप में दोनों आरोपियों को चार साल के कारावास की सजा सुना दी।

लेकिन सर्वोच्च न्यायालय को अधिक हैरानी उच्च न्यायालय के फैसले पर हुई है, जिसने दोनों आरोपियों की याचिका पर उनकी सजा घटा कर डेढ़ साल कर दी। अब दोषियों ने इस डेढ़ साल की भी सजा को समाप्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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