मानव परजीवियों से घातक लीवर के कैंसर का खतरा
सिडनी, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। मानव लीवर में रहने वाले परजीवी कृमि से ग्रेनुलिन नामक एक हार्मोन का स्राव कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि का कारण बन सकता है, इससे लीवर कैंसर हो सकता है।
क्वींसलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च (क्यूआईएमआर) के माइकल स्मट और एलेक्स लुकास ने कहा कि एक परजीवी के वृद्धि हार्मोन के मानव कोशिकाओं को प्रभावित कर सकने की खोज से वे उत्तेजित हैं।
लूकास ने कहा कि यह पता था कि ओ.वाइवेरिनी (लीवर कृमि) द्वारा कुछ निश्चित प्रोटीनों के स्राव से कोशिकाओं की वृद्धि होती है। बहरहाल प्रोटीन की पहचान ज्ञात नहीं थी।
उन्होंने कहा, "हमें पता था कि परजीवी ग्रेनुलिन का स्राव करते हैं लेकिन यह पता नहीं था कि यह अपने समीप की मानव कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है।"
लूकास के अनुसार इस खोज से यह पता लगाने में सहायता मिलेगी कि परजीवी कैसे कैंसर का कारण बनता है।
उत्तरी थाईलैंड में लीवर कृमि से प्रभावित लोगों की संख्या सबसे अधिक है। इलाके के करीब 70 लाख लोग इससे संक्रमित हैं।
जहां केवल एक प्रतिशत से भी कम लोग एक अन्य कैंसरजनक परजीवियों जैसे एच.पिलोरी और पैपीलोमा वायरस से संक्रमित हैं वहीं 17 प्रतिशत ओ.वाइवेरिनी से ग्रस्त हैं, जिससे कैंसर हो सकता है।
इस अध्ययन को क्वींसलैंड विश्वविद्यालय, खोन काएन (थाईलैंड) और जार्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय (अमेरिका) ने कराया है।
अध्ययन के निष्कर्षो को पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस पैथोजेंस पर प्रकाशित किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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