नक्सलियों के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई नहीं

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नक्सलियों के ख़िलाफ़ सेना के इस्तेमाल से इनकार किया है और कहा कि अगर नक्सली हिंसा का रास्तो छोड़ दें, तो उनसे बातचीत हो सकती है.

उन्होंने नक्सलियों को आतंकवादियों की श्रेणी में डालने से भी इनकार किया.

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार नक्सलियों को आतंकवादी संगठनों की सूची में डालने पर विचार कर रही है, मनमोहन सिंह ने कहा, "नक्सलियों पर ग़ैर क़ानूनी गतिविधि निषेध अधिनियम के तहत पाबंदी है."

मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलियों के ख़िलाफ़ सेना का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. प्रधानमंत्री ने कहा, "हम नक्सलियों के ख़िलाफ़ सेना के इस्तेमाल के पक्ष में नहीं हैं. नक्सलियों के ख़िलाफ़ अभियान के लिए पुलिस और अर्ध सैनिक बल पर्याप्त हैं."

नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके साथ बातचीत तभी संभव है, जब वे हिंसा का रास्ता छोड़ दें.

उन्होंने कहा कि नक्सलवादी ही क्यों, अगर जम्मू-कश्मीर के आतंकवादी हिंसा का रास्ता छोड़ दें, तो उनके साथ भी बातचीत हो सकती है.

पिछले कुछ महीनों में नक्सलवादी हिंसा में तेज़ी आई है. हाल ही में महाराष्ट्र के गढ़ चिरौली में नक्सलवादियों ने 17 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी.

जबकि कुछ दिनों पहले झारखंड के एक पुलिस इंस्पेक्टर की अपहरण के बाद गला काटकर हत्या कर दी गई थी.

ये भी माना जा रहा है कि केंद्र सरकार नक्सलवाद प्रभावित राज्य सरकारों के साथ मिलकर जल्द की नक्सलवादियों के ख़िलाफ़ बड़ा अभियान शुरू करने वाली है और इस संबंध में नई रणनीति बनाई गई है.

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