भारत नहीं, बल्कि पाकिस्तान कर रहा है आतंकवाद का निर्यात : प्रधानमंत्री (राउंडअप)
महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव प्रचार के अंतिम दिन मुंबई पहुंचे मनमोहन सिंह ने इस मौके पर नक्सलियों से हिंसा छोड़ सरकार के साथ वार्ता आरंभ करने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने यहां पत्रकारों से चर्चा में कहा कि पाकिस्तान की जनता और सरकार को महसूस करना चाहिए कि आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देने से दक्षिण एशिया को भारी खतरा है।
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान और अफगानिस्तान की स्थिति वैसी नहीं है, जैसी होनी चाहिए। दोनों देशों में बढ़ता आतंकवाद हम सभी के लिए चिंताजनक है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि पड़ोसी राष्ट्रों से देश में आतंकवाद के प्रसार से निपटने के लिए सरकार ने पर्याप्त तैयारी की है। इस संबध में सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
काबुल में भारतीय दूतावास पर हुए हमले के तीन दिन बाद और पाकिस्तान के सैन्य मुख्यालय पर हुए हमले के एक दिन बाद प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी की है।
सिंह ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में आतंकवादी गतिविधियों के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "इस संबंध में पाकिस्तान के सभी आरोप पूरी तरह गलत हैं।"
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान या किसी अन्य देश में आतंकवाद का निर्यात करने के काम में हम शामिल नहीं हैं। पाकिस्तान की जनता और सरकार को अच्छी तरह से पता है कि यह एक झूठा आरोप है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान को पिछले वर्ष के मुंबई हमले के साजिशकर्ताओं पर मुकदमा चलाना और दंडित करना चाहिए। भारत और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के राजनयिक दबाव के कारण पहली बार पाकिस्तान ने स्वीकार किया है कि उसके नागरिक आतंकवादी हमले और 170 लोगों की हत्या में शामिल थे।
सिंह ने कहा, "उन्हें इस मामले में शामिल हाफिज सईद, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद सहित सभी तत्वों की जांच करनी चाहिए। उन पर सही तरीके से मुकदमा चलाया जाना चाहिए जिससे उन्हें उपयुक्त दंड मिले। हमने इस बारे में उम्मीद नहीं छोड़ी है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहली बार पाकिस्तान ने स्वीकार किया कि हमले की योजना उसके देश में बनी। पाकिस्तानी नागरिक इसमें शामिल हुए। इससे पहले कभी भी पाकिस्तान ने यह स्वीकार नहीं किया था।
नक्सलियों से हथियार छोड़ने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने को कहा कि आने वाले महीनों में देश नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में 'सकारात्मक विकास' देखेगा।
सिंह ने कहा, "मैं हमेशा कहता हूं कि नक्सलवाद हमारी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार हर संभव उपाय अपनाएगी। आने वाले कुछ महीनों में आप इस संबंध में सकारात्मक विकास देखेंगे।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से वार्ता संभव है लेकिन केवल तभी, जब वे हथियार छोड़ दें।
उन्होंने कहा, "देश के कुछ हिस्सों खासकर मध्य भाग में नक्सलवाद बढ़ने से हम समाज के एक हिस्से विशेषकर जनजातियों में अलगाव की भावना देखने को बाध्य हुए हैं। परंतु एक सभ्य समाज में राज्य की पहली जिम्मेदारी कानून और व्यवस्था बनाए रखना है। नागरिकों के किसी भी हिस्से को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति होनी चाहिए।"
झारखण्ड में नक्सलियों द्वारा पुलिस अधिकारी की गला काटकर हत्या के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि नक्सलियों के 'गलत इरादों' के बारे सभी को पता है। उन्होंने कहा, "सरकार उनके गलत इरादों से अवगत है। उनको खत्म करने के लिए हम प्रभावी कदम उठाएंगे।"
उन्होंने कहा कि विदेशी शक्तियों से नक्सलियों के संबंधों के बारे में कोई विश्वसनीय सूचना नहीं है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "इस संबंध में हमेशा अफवाहें उड़ती रहती हैं लेकिन इसके बारे में कोई भी विश्वसनीय खुफिया जानकारी नहीं है।"
बढ़ती हुई महंगाई की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें रबी की अच्छी फसल की उम्मीद है और महंगाई का सबसे खराब दौर बीत चुका है।
उन्होंने कहा कि अक्टूबर-फरवरी में रबी की अच्छी फसल का महंगाई पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा, "कुछ चीजों के दाम बढ़ रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि रबी की फसल सामान्य होगी और इसका प्रभाव महंगाई पर पड़ेगा। संभवत: खराब समय बीत गया है।"
नदियों को जोड़ने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्रस्ताव पर कार्य जारी है लेकिन पर्यावरण संबंधी चिंताओं ने इसे धीमा कर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के वेतन के निर्धारण में सरकार दखल नहीं देना चाहती।
उन्होंने कहा, "मैंने इस मुद्दे को सामान्य तरीके से उठाया है। सरकार का सीईओ के वेतन पर नियंत्रण लगाने का कोई इरादा नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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