पाक फोन नंबरों पर 1.75 लाख रुपये की बात करने वाले की तलाश
पुलिस को फरार हसीन पर राष्ट्रविरोधी और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का शक है।
सिविल लाइन्स पुलिस थाने के निरीक्षक रामआधार सिंह ने आईएएनएस को बताया, " हसीन ने इश्तिकार आलम के माध्यम से फर्जी पहचान पत्र के जरिए 10 जुलाई को सिम कार्ड खरीदे। उसने प्रति सिमकार्ड के हिसाब से 20,000 रुपये का भुगतान किया और सिमकार्ड आजमगढ़ ले गया। उसने अगले दो दिनों में सभी सिमकार्डो को नष्ट कर दिया।
पुलिस पिछले बुधवार को हसीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने वाले आलम के गायब होने से भी परेशान है।
रामआधार सिंह ने बताया, "आलम ने सिम कार्ड आइडिया नेटवर्क के एक वितरक संजय तिवारी से हासिल किया था। इसके लिए इस्तेमाल किया गया पहचान पत्र राकेश कुमार का था। राकेश कुमार ने कुछ माह पहले कंपनी में काम किया था। आलम ने भी कंपनी में कुछ दिन काम किया था और अब वह दूसरी कंपनी में काम कर रहा है।"
राकेश कुमार अब मुंबई में दूसरी मोबाइल कंपनी के लिए काम कर रहा है।
पुलिस के विशेष कार्यबल (एसटीफ) और आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) को भी मामले की जांच में लगाया गया है। हसीन इलाहाबाद के करेली इलाके में किराए के मकान में रहता था और वह आलम द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद से परिवार के साथ गायब है।
रामआधार सिंह ने बताया, "हसीन ने 1.5 लाख रुपये के बिल का भुगतान भी किया और हमने पाया कि उसने पहले भी बड़ी संख्या में पोस्टपेड सिमकार्ड खरीदे और आजमगढ़ से कई देशों के नंबरों पर बात की है।"
इस बीच पुलिस आइडिया के स्थानीय कर्मचारियों से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।
इलाहाबाद रेंज के उप महानिरीक्षक चंद्र प्रकाश ने कहा, " इतने बड़े पैमाने पर घपला कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है और जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी। इसके अलावा हम संजय तिवारी से भी पूछताछ करेंगे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार सैन्य खुफिया भी मामले की जांच कर रही है और आजमगढ़ से जिन नंबरों पर बात की गई है उनका पता लगाया जा रहा है।
मामले की आगे जांच पड़ताल के लिए एक पुलिस दल आजमगढ़ भी भेजा गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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