सभी की नजर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव पर

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र, हरियाणा और अरूणाचल प्रदेश में मंगलवार को विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टियों कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विभिन्न राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इन तीनों राज्यों में मुख्य रूप से महाराष्ट्र पर है क्योंकि यहां के परिणाम का असर राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।

इन तीनों राज्यों में मंगलवार को लगभग नौ करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे लेकिन कांग्रेस, भाजपा और विभिन्न राजनीतिक विश्लेषकों की नजर महाराष्ट्र पर टिकी हुई है।

हाल ही में विभिन्न राज्यों में हुए उपचुनावों में हार का मुंह देखने वाली कांग्रेस और उसके सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का दावा है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उसी की जीत होगी।

महाराष्ट्र में सीधी टक्कर कांग्रेस-राकांपा गठबंधन और भाजपा-शिवसेना गठबंधन के बीच है। भाजपा-शिवसेना गठंबधन का कहना है कि इस बार वह कांग्रेस-राकांपा को सत्ता से बेदखल कर देगा।

राजनीतिक मामलों के विश्लेषक जी.वी.एल. नरसिम्हा राव ने आईएएनएस से कहा, "महाराष्ट्र में यदि कांग्रेस की फिर से जीत होती है तो उसके लिए यह काफी महत्वपूर्ण साबित होगी। इतने बड़े राज्य में लगातार तीसरी बार जीत हासिल करना महत्वपूर्ण माना जाएगा।"

राव ने कहा, "लोकसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा के लिए यह चुनाव एक अवसर की तरह है। महाराष्ट्र जैसे राज्य में जीत हासिल कर भाजपा खुद को मजबूत बना सकती है। "

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से कई प्रमुख उम्मीदवारों का भी राजनीतिक भविष्य जुड़ा हुआ है, जिसमें कांग्रेस नेता और राज्य के मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण का नाम शामिल है। यहां राकांपा भी चाहेगी कि वह अधिक से अधिक सीटों पर जीत हासिल करे।

महाराष्ट्र में भाजपा सबसे बड़े जनाधार वाले नेता गोपीनाथ मुंडे भी चाहेंगे कि उनकी पार्टी चुनाव में बड़े दल के रूप में उभरे ताकि वह राज्य के कद्दावर नेता रूप में सामने आ सकें। कुछ इसी तरह शिवसेना में उद्धव ठाकरे भी सोच रहे हैं।

भाजपा और शिवसेना को सबसे अधिक परेशानी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से है, जिसने लोकसभा चुनाव में इनके वोटों में सेंधमारी की थी। राव ने कहा कि इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भाजपा और शिवसेना के लिए खतरा है।

महाराष्ट्र में कुल 7.6 करोड़ मतदाता हैं, वहीं चुनाव मैदान में 3,559 उम्मीदवार अपना राजनीतिक भाग्य आजमा रहे हैं।

अधिकतर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हरियाणा और अरूणाचल प्रदेश में कांग्रेस आगे रह सकती है। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुडा ने कहा है कि राज्य में कांग्रेस के हाथों में ही सत्ता आएगी। वहीं विपक्षी दल उनके दावों को नकार रहे हैं।

अरुणाचल प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर कुछ अलग दिख रही है। यहां कांग्रेस अभी से ही आगे नजर आ रही है। राज्य के 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के तीन उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं।

निर्वाचन आयोग के अनुसार तीनों राज्यों के चुनाव परिणामों की घोषणा 22 अक्टूबर को होगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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