'पालथी मारकर बैठना गठिया के लिए खतरनाक'
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। चिकित्सकों का कहना है कि पालथी मारकर और पैर पर पैर रखकर बैठने की भारतीय परंपरा गठिया की बीमारी को और भी खतरनाक बना सकती है।
चिकित्सकों के मुताबिक 'ओस्टियोअर्थराइटिस' (जोड़ों में होने वाला गठिया) ढ़लती उम्र के लोगों में होने वाली एक सामान्य बीमारी है। इस बीमारी में जोड़ों की सतह क्षतिग्रस्त हो जाती है और आसपास की हड्डियां मोटी हो जाती हैं।
अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक आर. के. शर्मा कहते हैं कि जो लोग उनके वजन में बढ़ोत्तरी के साथ जोड़ों में दर्द महसूस करें उन्हें गठिया की शुरुआत को रोकने के लिए पैर पर पैर रखकर या पालथी मारकर बैठने से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा, "पालथी मारकर और पैर पर पैर रखकर बैठना पुरानी भारतीय परंपरा है। जिन लोगों में गठिया होने की संभावना होती है उनके लिए यह बेहद खतरनाक हो सकता है।"
शर्मा ने कहा कि उनके मरीजों में से ज्यादातर को, खासकर 30-40 आयु वर्ग की महिलाओं को इस आदत की वजह से बहुत परेशानी उठानी पड़ती है।
'आर्टीमिस हेल्थ इंस्टीट्यूट' में ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख हर्षवर्धन हेगड़े ने आईएएनएस से कहा, "प्रतिदिन व्यायाम करने वाले स्वस्थ लोगों में पालथी मारकर और पैर पर पैर रखकर बैठना कोई परेशानी खड़ी नहीं करता, लेकिन जो लोग व्यायाम नहीं करते हैं और बैठने का यह तरीका अपनाते हैं उनके घुटनों में खिंचाव होता है। परिणामस्वरूप जोड़ों की विकृति से गठिया रोग हो जाता है।"
विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'लीग ऑफ एसोसिएशंस फॉर रयूमेटोलॉजी' (आईएलएआर) के अध्ययन 'कम्युनिटी ओरिएंटेड प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ रयूमेटिक डिसीज' (सीओपीसीओआरडी)के मुताबिक भारत के 15 प्रतिशत लोग विभिन्न प्रकार के गठिया रोग से पीड़ित होते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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